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Saturday, March 7, 2026

सिरपुर : संस्कृति, इतिहास और अध्यात्म का संगम

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रायपुर/छत्तीसगढ़ जनसंपर्क/27 अक्टूबर 2025

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित सिरपुर (श्रीपुर) भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों का जीवंत प्रतीक है। यह नगर महान सम्राट महाशिवगुप्त बालार्जुन की राजधानी रहा है और अपनी स्थापत्य कला, बौद्ध धरोहरों तथा प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। सिरपुर का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों और अभिलेखों में मिलता है। सातवीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी सिरपुर का वर्णन किया था, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय ख्याति सिद्ध होती है।

सिरपुर में भगवान शिव, विष्णु, बुद्ध और जैन धर्म के उपासना स्थलों के अवशेष प्राप्त हुए हैं।yqhqn 22 शिव मंदिर, 5 विष्णु मंदिर, 3 जैन विहार और एक विशाल बौद्ध विहार के प्रमाण मौजूद हैं। लक्ष्मण मंदिर, जो भारत का पहला ईंटों से निर्मित मंदिर माना जाता है, यहां की स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण है। आनंद प्रभु कुटीर विहार बौद्ध भिक्षुओं का प्रमुख केंद्र रहा है, जबकि गंधेश्वर मंदिर शिव आराधना का प्राचीन प्रतीक है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा सिरपुर में लगातार संरक्षण और मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। अब यहां डिजिटल टूर, क्यू_आर कोड आधारित जानकारी और थ्रीडी गाइडेंस सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। हर वर्ष आयोजित सिरपुर महोत्सव अब छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है, जिसमें देश-विदेश के कलाकार शास्त्रीय नृत्य, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियाँ देते हैं।

राज्य सरकार ने विजन 2047 के तहत सिरपुर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटक कॉरिडोर, सड़कों और प्रकाश व्यवस्था सहित आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। सिरपुर केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है — एक ऐसा स्थल, जहाँ इतिहास बोलता है, संस्कृति मुस्कुराती है और अध्यात्म सांस लेता है।

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