स्वामी ज्योतिर्मयानंद बोले—अनजाने में भी की गई भक्ति मोक्ष का मार्ग खोल देती है।
बेमेतरा :_शिव महापुराण/ 12/12/2025
बेमेतरा की कृषि उपज मंडी में चल रही शिवमहापुराण कथा के दौरान कथा-स्थल में भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का गहन वातावरण बना रहा।
स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती जी ने शिव महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शिव संसार के सबसे करुणामय देव हैं—
“भोलेनाथ पर यदि भूलवश भी बिल्वपत्र या जल अर्पित हो जाए, तो वे पापी से पापी जीव को भी पावन कर देते हैं।”
स्वामी जी ने पुराणों में वर्णित व्याध प्रसंग को सामने रखते हुए कहा कि एक दुष्ट प्रवृत्ति वाला शिकारी शिवरात्रि की रात्रि में बिल्व वृक्ष पर बैठा था और अनजाने ही उसके द्वारा जल तथा बिल्वपत्र शिवलिंग पर चढ़ते रहे। तीन पहर बीतने पर स्वयं भगवान शिव प्रकट हुए और व्याध को आशीष देते हुए कहा कि अनजाने ही की गई पूजा भी उद्धार का मार्ग बन जाती है। शिव ने उसे अगले जन्म में पुण्यात्मा निषादराज बनने का वरदान दिया।
स्वामी जी ने कहा कि यह प्रसंग बताता है कि,
“शिव भाव के भूखे हैं, कर्मकांड के नहीं”
उनके लिए भक्ति की पवित्रता ही सर्वोपरि है।
कथा को आगे बढ़ाते हुए स्वामी जी ने ब्रह्मा–नारद संवाद और सूत जी और ऋषियों की जिज्ञासा के साथ बारह ज्योतिर्लिंगों की महिमा का उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि—
“ज्योतिर्लिंगों का प्रत्यक्ष दर्शन न हो, तो केवल इनके नामों का स्मरण भी मोक्षकारी माना गया है।”
दक्ष की 27 कन्याओं और चंद्रमा के विवाह प्रसंग का उल्लेख करते हुए स्वामी जी ने सामाजिक संदेश देते हुए कहा कि नेतृत्व वही है जो सभी का समान पालन-पोषण करे। परिवार से लेकर शासन तक, सभी को समान अवसर और सुरक्षा देना ही सच्चा धर्म है।
अंत में स्वामी जी ने शिव के औघड़, दिगंबर और करुणामय स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा—


