जन_चौपाल 36
सलधा (छत्तीसगढ़), [दिनांक24_06_2025]
सनातन धर्म में चातुर्मास्य का अत्यंत विशेष महत्व है। यह वह कालखंड होता है जब संन्यासी, परिव्राजक परंपरा का पालन करते हुए चार मास तक एक ही स्थान पर रुकते हैं और क्षेत्र के श्रद्धालुओं को अपने दर्शन, पूजन, प्रवचन, भिक्षा वंदन और जिज्ञासा समाधान के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ प्रदान करते हैं।
इसी दिव्य परंपरा के अंतर्गत इस वर्ष पूज्य दण्डी स्वामी श्रीमज्ज्योतिर्मयानन्दः सरस्वती जी महाराज का द्वितीय चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान भव्य रूप से सपादलक्षेश्वर धाम, सलधा में संपन्न हो रहा है। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक रूप से लाभकारी है, बल्कि जनमानस को धर्म के प्रति जागरूक करने का एक दुर्लभ अवसर भी है।
चातुर्मास्य का शास्त्रीय महत्व
शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है:
“चातुर्मास्यं यतीनां चयः कारयति धर्मवित् ।
सफलं लभते सम्यक् राजसूयाश्वमेधयोः ॥”
अर्थात जो व्यक्ति संन्यासी के चातुर्मास्य का आयोजन करता है, उसे राजसूय एवं अश्वमेध यज्ञों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। वर्तमान काल में जबकि राजसूय जैसे यज्ञ अब संभव नहीं हैं, ऐसे में यह चातुर्मास्य आयोजन उस पुण्य को प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम बनता है।
चातुर्मास्य के अंतर्गत प्रमुख आयोजन:
🔸 सवा लाख शिवलिंग स्थापना महायोजना:
भक्तगण ₹5100/- की सहयोग राशि के साथ अपने नाम से एक शिवलिंग स्थापित करवा सकते हैं।
🔸 पद्म पुराण कथा:
पूरे चातुर्मास्य काल में श्रद्धेय स्वामीजी के सान्निध्य में पद्म पुराण कथा का वाचन होगा।
🔸 श्रावण मास में नि:शुल्क रुद्राभिषेक:
श्रद्धालु स्वयं उपस्थित होकर अपने व परिवारजनों के नाम से रुद्राभिषेक कर सकते हैं।
🔸 विशाल महाभंडारा सेवा:
₹11,000/- सहयोग राशि देकर अपने नाम से एक दिन का भंडारा कराना संभव है।
इसके अतिरिक्त श्रद्धालु चावल, दाल, तेल, सब्जी आदि सामर्थ्यानुसार दान स्वरूप दे सकते हैं।
जनसंपर्क हेतु विवरण:
📞 कार्यालय संपर्क: 9111320453
📱 अन्य मोबाइल नंबर्स:
7999479262, 6261409376, 9575210769, 9131339902, 8959339292
📍 स्थान: सपादलक्षेश्वर धाम, सलधा
👣 अध्यक्षता में: श्रद्धेय दण्डी स्वामी श्रीमज्ज्योतिर्मयानन्दः सरस्वती जी महाराज
नोट: यह समाचार सभी धर्मप्रेमी, भक्तगण एवं जनप्रतिनिधियों के लिए आमंत्रण भी है कि वे समय निकालकर इस पुण्य महोत्सव में सहभागी बनें एवं धर्म लाभ प्राप्त करें।


