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Wednesday, October 21, 2026

भिलाई नगर निगम के सात अभियंताओं को हाईकोर्ट से राहत, कार्रवाई और वसूली के आदेश पर लगी रोक

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 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के भिलाई नगर निगम में पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने सात अभियंताओं को अंतरिम राहत दी है। जस्टिस बीडी गुरु की एकल पीठ ने संबंधित अभियंताओं के खिलाफ प्रस्तावित अनुशासनात्मक कार्रवाई और कथित अतिरिक्त भुगतान की वसूली से जुड़े निर्देशों पर रोक लगा दी है। इसके अलावा मुख्य अभियंता की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस पर भी रोक लगाई गई है। अदालत ने राज्य के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव, दुर्ग कलेक्टर और नगर निगम भिलाई के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

वर्ष 2023-24 के निर्माण कार्यों से जुड़ा है मामला

यह पूरा मामला भिलाई नगर निगम की परियोजना शाखा के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में कराए गए पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों से संबंधित है। शहर की सड़कों, फुटपाथों और चौक-चौराहों पर पेवर ब्लॉक लगाने के इन कार्यों में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद दुर्ग कलेक्टर ने जांच कराने के निर्देश दिए थे। जांच में निर्माण से जुड़े अभिलेखों और मौके पर मौजूद कार्यों का मिलान किया गया। रिपोर्ट में दर्ज विवरण और वास्तविक निर्माण के बीच अंतर होने की बात सामने आई थी।

सात अभियंताओं ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

इस मामले में नगर निगम भिलाई में पदस्थ उप अभियंता अर्पित बंजारे, चंदन निर्मल, श्वेता महेश्वर, पुरुषोत्तम सिंहा, रीमा हुमने और कृष्ण कुमार जंघेल के साथ सहायक अभियंता श्वेता वर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। अधिवक्ता सिबाशीष मिश्रा के माध्यम से दायर याचिका में अभियंताओं ने अपने खिलाफ प्रस्तावित विभागीय कार्रवाई और कथित अतिरिक्त भुगतान की वसूली के निर्देशों को चुनौती दी।

संयुक्त जांच में 29 अनुबंधों की हुई पड़ताल

निर्माण कार्यों में अनियमितताओं की जांच के लिए लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन अभियंताओं की संयुक्त टीम गठित की गई थी। जांच दल ने निर्माण स्थलों का निरीक्षण करने के साथ संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की।

संयुक्त जांच रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 29 अनुबंधों की समीक्षा की गई। इनमें से 21 अनुबंधों में माप पुस्तिका में दर्ज निर्माण की मात्रा के मुकाबले मौके पर कम काम पाया गया। रिपोर्ट में 16 लाख 85 हजार 457 रुपये के कथित अतिरिक्त भुगतान का उल्लेख किया गया था।

जांच रिपोर्ट के आधार पर दुर्ग कलेक्टर ने नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर संबंधित अभियंताओं के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और अतिरिक्त भुगतान की राशि वसूलने के निर्देश दिए थे।

कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद अदालत पहुंचे अभियंता

कलेक्टर के निर्देशों के बाद मुख्य अभियंता ने सातों अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर निर्माण कार्यों में सामने आई कथित गड़बड़ियों पर जवाब मांगा था। इसके बाद अभियंताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जांच के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। इसके बावजूद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और वसूली के निर्देश जारी कर दिए गए।

अधिवक्ताओं ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का दिया हवाला

हाईकोर्ट में अभियंताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिए बिना ही उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की दिशा में कदम उठाए गए।

वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने अदालत में तर्क दिया कि यदि कार्रवाई के संबंध में पहले ही निर्देश जारी कर दिए गए हों, तो बाद में कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठता है। उन्होंने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया।

हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से मांगा जवाब

याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस बीडी गुरु की एकल पीठ ने दुर्ग कलेक्टर के 3 सितंबर 2026 के पत्र में उल्लिखित अनुशासनात्मक कार्रवाई और कथित अतिरिक्त भुगतान की वसूली संबंधी निर्देशों पर रोक लगा दी। अदालत ने मुख्य अभियंता की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस पर भी अंतरिम रोक लगाई है।

इसके साथ ही नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव, दुर्ग कलेक्टर और नगर निगम भिलाई के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

अंतिम फैसले तक जांच और जिम्मेदारी पर स्थिति स्पष्ट नहीं

हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से सातों अभियंताओं को फिलहाल राहत मिली है। हालांकि, अदालत ने अभी निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं या संबंधित अभियंताओं की जिम्मेदारी को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। मामले में आगे की स्थिति संबंधित अधिकारियों के जवाब और आगामी सुनवाई के बाद स्पष्ट होगी।

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