जगदलपुर/छत्तीसगढ़_09/02/2026
छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की सांस्कृतिक पहचान और जनजातीय अस्मिता का प्रतीक ‘बस्तर पण्डुम’ इस वर्ष प्रतियोगिताओं में 15,596 प्रतिभागियों की तुलना में 54,745 लोग भाग लिये जो बस्तर की सांस्कृतिक चेतना के सशक्त उभार को दर्शाता है।
बस्तर पण्डुम एक प्रमुख सांस्कृतिक, सामुदायिक और प्राकृतिक उत्सव है, जिसमें जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं को समेटे बस्तर के विभिन्न अंचलों से आए कलाकारों ने 12 पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
तीन दिवसीय संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम के समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने संबोधन में नक्सलवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा,
“हमारी लड़ाई किसी से नहीं है, हमारी लड़ाई उन लोगों से है जो मासूम जनता के लिए खतरा बनते हैं। आदिवासी गांवों में लगाए जाने वाले आईईडी से यह भी नहीं पता होता कि किसका पैर पड़ेगा और कौन हमेशा के लिए दिव्यांग हो जाएगा या किस निर्दोष की जान चली जाएगी।”
उन्होंने शेष बचे नक्सलियों से हथियार डालने की अपील करते हुए कहा कि सरकार सम्मान के साथ उनका पुनर्वासन करेगी। साथ ही मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री द्वारा तैयार किए गए पुनर्वासन पैकेज की सराहना करते हुए कहा कि इससे बेहतर और आकर्षक पैकेज संभव नहीं हो सकता।
अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग गांवों में गोली चलाएंगे, आईईडी लगाएंगे, खेतों, सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचाएंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। “हाथ में हथियार होगा, तो जवाब भी हथियार से दिया जाएगा,” उन्होंने कहा।
समापन पर उन्होंने कहा कि कोलंबिया, पेरू और कंबोडिया जैसे देशों के उदाहरण बताते हैं कि हिंसा से किसी का कल्याण नहीं हुआ, जबकि आज बस्तर पूरे देश के सामने एक उभरते हुए, आशावान क्षेत्र के रूप में नजर आ रहा है—जहाँ संस्कृति, विकास और शांति साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं।


