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Saturday, March 7, 2026

पण्डरिया शक्कर कारखाना: भ्रष्टाचार का ‘कड़वा’ सच? 13 बिंदुओं में खुली धांधली की पोल

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भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्ठा; कलेक्टर को सौंपी गई शिकायत ( कलेक्टर को लिखे जांच पत्र के आधार पर)जांच की मांग।

पण्डरिया (कबीरधाम) 01/03/2026

लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाने में करोड़ों के घोटाले की आहट सुनाई दे रही है। भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने कारखाना प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कलेक्टर कबीरधाम को 13 बिंदुओं का एक विस्तृत जांच पत्र सौंपा है। इस पत्र में उद्योग, किसानों और मजदूरों के हितों को ताक पर रखकर किए गए भ्रष्टाचार के सनसनीखेज दावे किए गए हैं।

मुख्य आरोप: बाजार से दोगुनी और 10 गुना ऊंची दरों पर खरीदी ।दस्तावेजों के अनुसार, कारखाने में खरीदी प्रक्रिया में भारी अनियमितता बरती गई है:
चूना खरीदी: जो चूना उत्पादक ₹7,000 प्रति टन में देने को तैयार था, उसे ₹14,000 प्रति टन की दर पर खरीदा गया।
पी.पी. बैग: ₹20 के बैग को ₹10 प्रति बैग अतिरिक्त दर पर खरीदा गया।
इंजीनियरिंग सामान: वाल्व और अन्य मशीनी सामानों को बाजार रेट से 10 गुना अधिक कीमत पर खरीदने का आरोप है।

राजस्व को चपत: शीरा (मोलासिस) बिक्री में खेल संघ ने शीरा बिक्री में सीधे तौर पर ₹12 लाख के नुकसान का दावा किया है:
समान निविदा: वर्धमान ट्रेडर (₹13,212) और शुभम ट्रेडर (₹13,213) को 1000-1000 टन का ऑर्डर दिया गया।
बाजार दर की अनदेखी: जबकि बालोद में बाजार भाव ₹13,900 था, जिससे प्रति टन ₹600 से अधिक की हानि हुई।
क्वालिटी में संदेह: सी-हैवी मोलासिस तैयार कर उसे बी-हैवी के बराबर बताकर शुद्धता से समझौता करने का आरोप है।

तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही
खराब फ्लो मीटर: पूरे पेराई सत्र में फ्लो मीटर बंद रहा, जिससे उत्पादन और वजन की गणना केवल ‘अनुमान’ पर की गई।
फर्जी ठेके: WTP संचालन के लिए ₹4.5 लाख और शुगर बैग हैंडलिंग के लिए ₹5.5 लाख प्रतिमाह का भुगतान बाहरी कंपनियों को किया जा रहा है, जबकि काम स्थानीय श्रमिक ही कर रहे हैं।
श्रम कानूनों का उल्लंघन: 21 नवंबर 2025 से लागू नए कानून के बावजूद 8-9 साल पुराने श्रमिकों को निकाला जा रहा है।
पर्यावरण एनओसी: पिछले 3 वर्षों से ई.टी.पी. (ETP) के पास वैध पर्यावरण एनओसी तक नहीं है।

जांच पर निष्कर्ष: भारतीय मजदूर संघ ने कलेक्टर से इन सभी मामलों की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह क्षेत्र का सबसे बड़ा प्रशासनिक घोटाला साबित हो सकता है।

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