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Saturday, March 7, 2026

नेवारी(कवर्धा )शराब दुकान का महिलाओं ने किया विरोध कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

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दृश्य: नेवारी गांव की चौपाल
(पात्र: ज्वाला – एक जागरूक युवा, ज्योतिपति – गांव के बुजुर्ग/जानकार, और अन्य ग्रामीण)

कवर्धा /छत्तीसगढ़_10/02/2026

ज्वाला: (अखबार पटकते हुए) देख रहे हो ज्योतिपति काका? ये कवर्धा-बिलासपुर रोड वाले नेवारी गांव में नई शराब दुकान खोलने की पूरी तैयारी हो गई है। महिलाएं कलेक्टर ऑफिस तक दौड़ लगा आई हैं, लेकिन प्रशासन टेंडर फाइनल करने में तुला है। मेरा तो सीधा सवाल है काका—क्या सरकार के पास कमाई का और कोई रास्ता नहीं बचा?

स्कूलों में मास्टर नहीं हैं, जो हैं वो कभी-कभार नशे में मिल रहे हैं, और इनको फिक्र है तो बस मधुशाला की!

ज्योतिपति: (गहरी सांस लेकर) ज्वाला, तुम्हारी बात में दम तो है बेटा। ये सिर्फ नेवारी गांव का दर्द नहीं है।पास में बेमेतरा शहर के बीचों-बीच देख लो, जहां कलेक्टर ऑफिस पास में है, लड़कियों का हॉस्टल है, पुराना कॉलेज है, वहां भी प्रीमियम दुकान खोलकर पूरे रहवासी इलाके को शराब का अड्डा बना दिया गया है। इसे सुशासन तो नहीं कहेंगे।

ज्वाला: (तंज कसते हुए) काका, मुझे तो वो दिन याद आ रहे हैं जब यही लोग गंगाजल की कसम खाने वाली पिछली सरकार को घेरते थे कि शराबबंदी क्यों नहीं हुई? आज जब खुद कुर्सी पर बैठे हैं, तो 1 अप्रैल 2025 से 67 नई दुकानें और खोल दीं! अब राज्य में कुल 741 दुकानें हो जाएंगी। ये कैसा दोहरा मापदंड है?

ज्योतिपति: सरकार का तर्क तो ये है कि ग्रामीण इलाकों में ‘अवैध शराब’ रोकने के लिए ये सरकारी दुकानें खोली जा रही हैं। लेकिन सरकार ये नहीं समझ रही कि दुकान कानूनी हो या गैर-कानूनी, वो घर तो उजाड़ती ही है। मैंने अपनी आंखों से कितने हंसते-खेलते परिवारों को बिखरते देखा है। बच्चों का भविष्य धूल में मिल रहा है।

ज्वाला: (गुस्से में) अजीब बात है! एक तरफ नशा मुक्ति केंद्र (Rehab Centers) चलाने का ढोंग और दूसरी तरफ घर-घर शराब पहुंचाने की तैयारी? क्या हम अपनी आने वाली पीढ़ी को सिर्फ नशे की गर्त में धकेलने के लिए सरकार चुनते हैं? हमें शिक्षा चाहिए, रोजगार चाहिए, अस्पताल चाहिए… ये सरकार हमें बोतल थमा रही है!

एक अन्य ग्रामीण: और सुना है नेवारी में तो जमीन मालिक ने पहले से ढांचा भी खड़ा कर लिया है, जैसे उसे पता हो कि मंजूरी यहीं की मिलनी है। ये तो मिलीभगत लग रही है।

ज्योतिपति: देखो भाइयों, जब तक जनता जागरूक होकर विरोध नहीं करेगी, ये सिलसिला थमेगा नहीं। नेवारी की महिलाओं ने मशाल जलाई है, अब पूरे कवर्धा को सोचना होगा कि हमें विकास के नाम पर शराब चाहिए या अपने बच्चों का सुरक्षित भविष्य।


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