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Wednesday, March 11, 2026

स्कूल वाले टैक्स से भागें, तो निगम क्यों बख्शे? — रायपुर में अब होगी सख्त कार्रवाई

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छत्तीसगढ़/रायपुर_ 11 मार्च 2026

राजधानी रायपुर के निजी स्कूल हर साल लाखों रुपए फीस वसूलते हैं, महंगी बसें चलाते हैं, एसी क्लासरूम बनाते हैं — लेकिन जब बात नगर निगम को प्रॉपर्टी टैक्स देने की आती है, तो अचानक इनकी “हिम्मत” जवाब दे जाती है। रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे ने होली से पहले तीन दिन का अल्टीमेटम दिया था — अपनी प्रॉपर्टी की स्वविवरणी जमा करो। लेकिन सात दिन बाद भी शहर के अधिकांश निजी स्कूलों ने कोई जानकारी नहीं दी।

मीडिया खबर से अब निगम प्रशासन का सब्र टूट रहा है और कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है।

बैठक में हाँ, असल में ना सवाल अनदेखी का है
बात सिर्फ इतनी नहीं कि स्कूलों ने देर की। असल बात यह है कि छत्तीसगढ़ निजी स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारी खुद महापौर के साथ हुई बैठक में मौजूद थे। वहाँ उन्होंने सुना, सहमति जताई — और घर जाकर भूल गए। निगम के किसी भी जोन में एक भी स्कूल ने अपनी प्रॉपर्टी का पूरा ब्यौरा जमा नहीं किया। यह लापरवाही नहीं, यह सीधी अनदेखी है।

वर्षों से टैक्स नहीं, और अब जानकारी भी नहीं
निगम की राजस्व उपायुक्त जागृति साहू बताती हैं कि शहर के करीब 42 स्कूलों से अब तक 38 लाख रुपए का प्रॉपर्टी टैक्स जमा हुआ है — ये वो स्कूल हैं जो ईमानदारी से टैक्स भरते आए हैं। लेकिन बाकी कई स्कूल न सिर्फ वर्षों से टैक्स नहीं दे रहे, बल्कि अब प्रॉपर्टी की जानकारी देने से भी कतरा रहे हैं।
सवाल उठता है — जो स्कूल प्रशासन से सुविधाएं लेता है, सड़क इस्तेमाल करता है, सफाई की उम्मीद रखता है, वो टैक्स देने से क्यों भागे?

निगम का अभियान जोरदार, पर स्कूल बेफिक्र
दूसरी तरफ रायपुर नगर निगम ने 4 से 9 मार्च के बीच महज पाँच दिनों में 5 करोड़ 33 लाख रुपए से ज्यादा प्रॉपर्टी टैक्स वसूला — 9 हजार 161 प्रॉपर्टी से। जोन-8 ने सबसे अच्छा प्रदर्शन करते हुए 1356 प्रॉपर्टी से 64 लाख 57 हजार रुपए वसूले। निगम सीमा में कुल 3 लाख 43 हजार से ज्यादा टैक्सेबल प्रॉपर्टी हैं — और अभियान जारी है।लेकिन इस पूरे अभियान में बड़े-बड़े निजी स्कूलों का रवैया शर्मनाक रहा।

जनता की राय
रायपुर के आम नागरिकों का कहना है कि जब एक छोटा दुकानदार, एक मकान मालिक और एक मध्यमवर्गीय परिवार समय पर टैक्स भरता है — तो करोड़ों की संपत्ति रखने वाले प्राइवेट स्कूल क्यों छूट पाएं? यह न्याय का सवाल है।

अब क्या होगा?नियम सबके लिए बराबर हो
निगम प्रशासन ने साफ कर दिया है कि महापौर और निगम आयुक्त को पूरी स्थिति से अवगत करा दिया गया है। जल्द ही बकायेदार स्कूलों के खिलाफ वसूली की कड़ी कार्रवाई शुरू होगी। उम्मीद है कि इस बार निगम सिर्फ नोटिस तक न रुके — बल्कि नियम सबके लिए बराबर हों, चाहे वो छोटा दुकानदार हो या बड़ा अंग्रेजी माध्यम का स्कूल।

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