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Saturday, March 7, 2026

स्कूल पहुंचने की रेस में ‘स्पीड’ से खेल रहे मासूम: नाबालिग चालकों की लापरवाही बनी खतरा

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छत्तीसगढ़/कोंडागांव, 16 जुलाई 2025

नाबालिग छात्रों की बेलगाम बाइक और स्कूटर से शहर की सड़कों पर इन दिनों एक नया खतरा मंडरा रहा है ।क्यों नाबालिकों को गाड़ी दी जा रही है यह क्या वात्सल्य प्रेम है या वात्सल्य को खतरे में डालना है। नाबालिक का अर्थ सीधा यही होता है कि अभी वह परिपक्व नहीं है उनका दिमाग अभी पूर्ण रूप से विकसित नहीं हुआ है उनको स्पीड तो मालूम है नियंत्रण पर उनका ध्यान नहीं है।
स्कूल जाने की हड़बड़ी में बिना लाइसेंस और अनुभव के बच्चे दोपहिया वाहनों पर फर्राटा भरते नजर आ रहे हैं। न सिर्फ अपनी सुरक्षा को जोखिम में डाल रहे हैं, बल्कि राहगीरों और ट्रैफिक व्यवस्था के लिए भी चुनौती बनते जा रहे हैं।
नगर के अधिकांश निजी और शासकीय स्कूलों के आसपास सुबह और दोपहर के समय तेज रफ्तार से दौड़ती बाइकें आम दृश्य बन चुकी हैं। कई छात्र हेलमेट तक नहीं पहनते, और ट्रैफिक सिग्नल या नियमों का पालन तो दूर की बात है।
यातायात विभाग की ओर से लगातार जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। साथ ही अभिभावकों को भी समझाइश दी जा रही है कि वे अपने नाबालिग बच्चों को वाहन न चलाने दें। पर हालात में कोई खास सुधार नहीं हो रहा। कुछ अभिभावक इसे महज सुविधा मान रहे हैं, जबकि कई इसे जानबूझकर नजरअंदाज कर रहे हैं — यह लापरवाही अब अपराध की सीमा में पहुंच गई है।
एडिशनल एसपी कौशलेंद्र पटेल ने चेतावनी देते हुए कहा, “यह महज एक ट्रैफिक उल्लंघन नहीं, बल्कि समाज के लिए गंभीर संकेत है। स्कूलों में जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं, लेकिन परिवार की भागीदारी के बिना नतीजे नहीं मिल सकते।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई नाबालिग सड़क दुर्घटना में शामिल होता है, तो उसकी जिम्मेदारी सिर्फ चालक की नहीं, बल्कि अभिभावकों की भी होगी और कानूनी कार्रवाई से वे नहीं बच सकेंगे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों को सुरक्षा की जिम्मेदारी सिखाना केवल पुलिस या स्कूलों की नहीं, हर घर की प्राथमिकता होनी चाहिए। ज़रा-सी लापरवाही किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है, जिसका पश्चाताप जीवनभर पीछा नहीं छोड़ेगा।

अब जनचौपाल_36 पर चर्चा यह है कि पहले के समय में जब यातायात और भीड़ नहीं थी तब भी गुरुकुल आश्रम राज्य से दूर सुदूर जगह में स्थापित किया गया जाता था जहां केवल पढ़ाई होती थी। अब तो स्कूल_कॉलेजों के पास रोज शोरगुल, यातायात का दबाव के साथ पान गुटखा सिगरेट की बिक्री के साथ शराब की बिक्री सब धड़ल्ले से चालू है यह कहानी एक जगह की नहीं है सभी जगह की है।


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