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Friday, September 25, 2026

हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति आयोग का आदेश किया रद्द, कहा-आपराधिक अपराध तय नहीं कर सकते

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बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति आयोग के एक आदेश पर बड़ा फैसला सुनाया है. दरअसल, हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति आयोग के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें एक असिस्टेंट प्रोफेसर को एससी-एसटी अधिनियम में दोषी ठहराया गया था. साथ ही एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई थी. हाई कोर्ट ने कहा कि कोई भी वैधानिक आयोग आपराधिक अपराध की सजा नहीं सुना सकती.

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, पूरा मामला कुछ ऐसा है कि छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के बरपाली सरकारी कॉलेज की एक छात्रा ने असिस्टेंट प्रोफेसर मृगेश कुमार यादव पर आरोप लगाया था कि उन्होंने 2019 में नकल के मामले को दबाकर उसे ब्लैकमेल किया. यादव और उनके सहयोगी ने उसे परीक्षा के दौरान नकल करते हुए पकड़ा था.युवती ने यह भी आरोप लगाया कि, उसका यौन उत्पीड़न किया गया.

पूरा कांड तब बड़ा और हो गया पुलिस की जांच में आरोप बेबुनियाद निकले थे. जिसके फैसले से नाराज छात्रा राज्य अनुसूचित आयोग में गई. मार्च 2021 में आयोग ने एससी-एसटी अधिनियम की धारा 3(1) के तहत प्रोफेसर मृगेश कुमार यादव पर पर लगे आरोपों को सही ठहराया और FIR दर्ज कराने की सिफारिश की.

यादव के वकील ने क्या कहा ?

आयोग के फैसले पर यादव के वकील कबीर कलवानी ने कहा कि आयोग ने उन्हें दोषी ठहराकर अपनी वैधानिक शक्तियों का उल्लंघन किया है. बकौल वकील आयोग ने सिफारिश करने वाली के बजाय फैसला सुनाने वाली संस्था के तहत का किया.

इसपर आयोग की वकील पूर्णिमा सिंह ने तर्क दिया कि निर्देश सलाहकारी था और इसका मकसद एससी समुदाय के सदस्यों के अधिकारियों की रक्षा करना था. इसी तर्क को हाई कोर्ट ने खारिज किया. कोर्ट ने आयोग की सीमाओं के बारे में बताया और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए निर्देश रद्द किया.

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