सामाजिक न्याय तभी पूर्ण होगा जब अंतिम पंक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचने लगेगा
रायपुर/जनचौपाल36(PIB- 03/09/2025)
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने मंगलवार को रायपुर में कहा कि
“सामाजिक न्याय केवल नारा नहीं, यह एक प्रतिबद्धता है – अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचाना ही इसका वास्तविक अर्थ है।”
राजधानी स्थित राज्य अतिथि गृह ‘पहुना’ में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मंत्री ने मंत्रालय की योजनाओं की प्रगति का जायज़ा लिया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुँचना चाहिए।
“सहायता नहीं, सशक्तिकरण ज़रूरी”
आठवले ने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाएँ अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और दिव्यांगजनों के लिए केवल सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि मुख्यधारा से जोड़ने और आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने का रास्ता हैं।
उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और स्वरोजगार को सामाजिक परिवर्तन के प्रमुख स्तंभ बताते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में केंद्र की पहल से देश के वंचित तबकों में सकारात्मक बदलाव आया है।
दिव्यांगजनों और छात्रवृत्तियों पर विशेष ध्यान
समीक्षा बैठक में मंत्री ने खासतौर पर दिव्यांगजन सशक्तिकरण, छात्रवृत्ति योजनाएं, और स्वरोजगार कार्यक्रमों की प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में योजनाओं की पहुँच और प्रभाव को और व्यापक बनाने की आवश्यकता है।
बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, समाज कल्याण, और अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया, जिनमें तारण प्रकाश सिन्हा, डॉ. सारांश मित्तर और रोक्तिमा यादव शामिल थे। इन अधिकारियों ने राज्य में चल रही योजनाओं की उपलब्धियों और चुनौतियों की जानकारी दी।
प्रेस वार्ता में दिया ‘सबका साथ’ का संदेश
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री आठवले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” मंत्र को दोहराते हुए कहा कि यही विचार सामाजिक न्याय की नीतियों में भी झलकता है। उन्होंने यह भी बताया कि देश में उत्पीड़न की घटनाओं में कमी आई है, जो कि जागरूकता और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का परिणाम है।
“अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे विकास की रोशनी”
मंत्री ने अपने वक्तव्य में ज़ोर देते हुए कहा:
“जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से नहीं जोड़ा जाता, तब तक सामाजिक न्याय अधूरा है। केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय से यह लक्ष्य अवश्य पूरा होगा।”


