सनातन और राजनीति:_धर्म भक्ति और आस्था तो बहुत प्राचीन सनातन धर्म का हिस्सा है लेकिन गुलामी के बाद की राजनीति को तो 100 साल भी नहीं हुआ है।
रायपुर_26/12/2025
छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों ‘सनातन’ और ‘हिंदुत्व’ को लेकर बहस तेज हो गई है। धार्मिक कथावाचक बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के हालिया बयानों के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। उनके वक्तव्यों पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पलटवार ने इस विवाद को और हवा दे दी है।
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने एक बयान में कहा कि हिंदुओं को जोड़ने और ‘भक्ति-राष्ट्रवाद’ की बात करना अंधविश्वास नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इसे अंधविश्वास मानते हैं, उन्हें देश छोड़ देना चाहिए। इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शास्त्री पर टोटके और अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि इस तरह की बातें समाज को गुमराह करती हैं।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब छत्तीसगढ़ में धर्म और राजनीति के मुद्दों पर पहले से ही मतभेद दिखाई दे रहे हैं। शास्त्री के कार्यक्रमों और उनके बयानों को लेकर प्रदेश के विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों में अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ वर्ग इसे धार्मिक जागरण से जोड़कर देख रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण का कारण मान रहे हैं।
धर्मांतरण के मुद्दे पर भी धीरेंद्र शास्त्री ने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का हिंदू समाज अब जागृत हो रहा है। भविष्य में वे सरगुजा और जशपुर क्षेत्र में कथा आयोजित करने की योजना बना रहे हैं, जहां बड़े चर्च के सामने मंच लगाए जाने की बात भी कही गई है। उन्होंने धर्मांतरण के तीन कारण बताए—अशिक्षा, आर्थिक कमजोरी और अंधविश्वास—और इनके समाधान के लिए शिक्षा, सामाजिक सहयोग और धार्मिक आयोजनों की आवश्यकता बताई।
कुल मिलाकर, ‘सनातन’ और ‘हिंदुत्व’ की बहस ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई सियासी चर्चा को जन्म दिया है, जिसका असर आने वाले समय में राजनीतिक माहौल पर भी पड़ सकता है।


