यह रिपोर्ट रिटेल महंगाई दर (CPI) और खाद्य महंगाई (CFPI) जैसे प्रमुख आर्थिक संकेतकों पर आधारित है।
रायपुर, 13 अगस्त 2025 जनचौपाल_36
(सौजन्य नमो ऐप)
देश के आम उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 में खुदरा महंगाई दर (CPI आधारित) घटकर 1.55% रह गई, जो पिछले आठ वर्षों का सबसे निचला स्तर है। महंगाई में यह गिरावट मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई तेज कमी की वजह से दर्ज की गई है।
यह भी उल्लेखनीय है कि छह वर्षों में पहली बार महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक के तय 2% से 6% के दायरे से नीचे आ गई है। इससे पहले जून 2017 में महंगाई इतनी कम रही थी।
खाद्य महंगाई भी नकारात्मक
खाद्य महंगाई (CFPI) जुलाई में –1.76% पर रही, यानी औसतन खाद्य वस्तुओं के दाम घटे। सब्जियां, दालें, अनाज और फल जैसी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दामों में नरमी से उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ कम हुआ।
शहरी और ग्रामीण दोनों को राहत
ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई घटकर 1.18% पर आ गई, जबकि ग्रामीण खाद्य महंगाई –1.74% रही।
शहरी क्षेत्रों में महंगाई 2.05% और खाद्य महंगाई –1.90% दर्ज की गई।
संभावित असर
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि महंगाई में यह कमी उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा दे सकती है। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह गिरावट लंबे समय तक टिकेगी, इसकी गारंटी नहीं है, क्योंकि मौसम और वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।
RBI पर नजर
रिजर्व बैंक ने फिलहाल अपनी रेपो रेट 5.50% पर स्थिर रखी है। लेकिन, महंगाई में लगातार गिरावट भविष्य में मौद्रिक नीति में राहत की संभावना बढ़ा सकती है।
सरल शब्दों में – जुलाई की महंगाई दर ने आठ साल का रिकॉर्ड तोड़ा है और आम लोगों के लिए यह फिलहाल राहत का संकेत है। अगर यह रफ्तार जारी रही तो आने वाले महीनों में थाली और जेब दोनों हल्की रहेंगी।


