छत्तीसगढ़ : हाई कोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पति की अपील खारिज कर दी। पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी उसे काले रंग और मोटे शरीर वाला कहकर अपमानित करती थी। अदालत ने कहा कि इस तरह के आरोप, जब ठोस साक्ष्य से साबित न हों, अपने आप में तलाक की डिक्री देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं बनते।
फैमिली कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट ने रखा बरकरार
जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें पति की तलाक की याचिका खारिज की गई थी। वहीं पत्नी की ओर से दायर स्त्रीधन वापस करने की मांग को स्वीकार किया गया था।हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद 25 जून को फैसला सुरक्षित रखा था। इसके बाद 18 सितंबर को अदालत ने अपना निर्णय सुनाया।
2019 में हुई थी शादी, कुछ महीने बाद अलग रहने लगी पत्नी
मामला जांजगीर चांपा जिले के 28 वर्षीय अक्ष घोष और रायगढ़ जिले की 25 वर्षीय पूजा सीत से जुड़ा है। दोनों की शादी 7 मार्च 2019 को रायगढ़ जिले के एक गांव में हुई थी। शादी के बाद महिला करीब दो से तीन महीने तक पति और उसके परिवार के साथ रही।पति का आरोप था कि इस दौरान पत्नी का व्यवहार उसके प्रति ठीक नहीं था। उसने पत्नी पर झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देने और बार बार मायके जाने का आरोप लगाया। पति के मुताबिक, पत्नी उसकी अनुमति के बिना एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने राजस्थान चली गई और करीब 25 दिन बाद वापस लौटी।पति ने यह भी दावा किया कि इसके बाद उसकी पत्नी का जुड़वां बच्चों का गर्भपात हो गया। उसका कहना था कि इसके बाद महिला की मां उसे रायगढ़ ले गई और कई प्रयासों के बावजूद वह वापस ससुराल नहीं आई।
पत्नी ने पति पर लगाए अलग आरोप, अवैध संबंध और दुर्व्यवहार का किया दावा
पत्नी ने शादी होने की बात को स्वीकार करते हुए पति की ओर से लगाए गए अन्य आरोपों से इनकार किया। उसका आरोप था कि पति का किसी दूसरी महिला के साथ अवैध संबंध था। पत्नी के मुताबिक, इस जानकारी के बाद पति ने शराब का सेवन शुरू कर दिया और उसके साथ दुर्व्यवहार करने लगा।महिला ने यह भी कहा कि गर्भावस्था के दौरान उसे उचित इलाज नहीं दिया गया। बीमार होने पर उसकी मां उसे रायगढ़ के अस्पताल लेकर गई थी। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उसने पति और उसके परिवार से उसे वापस ले जाने के लिए कहा, लेकिन उनका कहना था कि उसे वापस नहीं ले जाया गया।इसके बाद 24 फरवरी 2020 को महिला की मां ने रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। महिला ने घरेलू हिंसा कानून के तहत पति और उसके परिवार के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में भी कार्रवाई शुरू की थी।
ठोस सबूत नहीं मिलने पर पति के दावों को अदालत ने नहीं माना
मामले में उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि पति अपनी पत्नी की ओर से क्रूरता और परित्याग किए जाने के आरोपों को प्रमाणित नहीं कर सका। अदालत के मुताबिक, पति ने कई आरोप लगाए, लेकिन उन्हें साबित करने के लिए पर्याप्त ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए गए।अदालत ने विशेष रूप से पति को काले रंग या मोटे शरीर वाला कहे जाने के आरोप पर भी विचार किया। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इस तरह का आरोप तलाक की डिक्री देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।
पत्नी के अलग रहने को भी बिना उचित कारण के परित्याग साबित नहीं किया जा सका
हाई कोर्ट ने यह भी माना कि पति यह साबित करने में सफल नहीं रहा कि पत्नी बिना किसी उचित कारण के अपने माता पिता के साथ रह रही थी। साथ ही वह यह भी प्रमाणित नहीं कर सका कि पत्नी ने वैवाहिक संबंध पूरी तरह समाप्त करने की मंशा से उसे छोड़ दिया था।इन परिस्थितियों में हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही माना और पति की तलाक संबंधी अपील खारिज कर दी। अदालत ने बिना किसी लागत के अपील खारिज करते हुए डिक्री तैयार करने का निर्देश दिया।


