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Wednesday, August 5, 2026

हाथीदांत तस्करी का भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजे गए

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रायपुर, 4 अगस्त 2026

वन विभाग ने तीनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। विभाग ने बताया कि भारतीय जंगली हाथी अनुसूची-1 के तहत संरक्षित वन्यजीव है, इसलिए हाथीदांत की तस्करी को गंभीर वन अपराध माना जाता है।

छत्तीसगढ़ में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ वन विभाग की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। इसी कड़ी में बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में हाथीदांत तस्करी के एक मामले का खुलासा करते हुए वन विभाग ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। आरोपियों के कब्जे से हाथी के जबड़े के तीन हाथीदांत बरामद किए गए हैं।

वन विभाग के अनुसार, 3 अगस्त को मुखबिर से सूचना मिली थी कि रामानुजगंज स्थित एक धर्मशाला में हाथीदांत की अवैध खरीद-फरोख्त की तैयारी चल रही है। सूचना के आधार पर वन मंडलाधिकारी आलोक वाजपेयी के मार्गदर्शन में वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (मध्य क्षेत्र, भोपाल), राज्य उड़न दस्ता रायपुर और वनमंडल बलरामपुर की संयुक्त टीम ने आमंत्रण धर्मशाला के कमरा नंबर 205 में छापेमारी की।
तलाशी के दौरान एक बैग से हाथी के जबड़े के तीन हाथीदांत बरामद किए गए। मौके पर मौजूद तीन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान झारखंड के पलामू निवासी संतोष कुमार विश्वकर्मा (42), तथा बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के अजय कुमार गुप्ता (49) और सतेन्द्र कुमार (50) के रूप में हुई है।
जब्त हाथीदांत को वन विभाग ने अपने कब्जे में लेकर आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रामानुजगंज की अदालत में पेश किया, जहां से तीनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
वन विभाग ने बताया कि मामले की जांच जारी है और इस तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
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