बालकनी की लोहे की रेलिंग बनी मौत का कारण! करंट की चपेट में आकर एक ही परिवार के तीन लोगों की दर्दनाक मौत

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बलौदाबाजार, 8 नवंबर 2026

घर के पास से गुजर रही बिजली लाइन और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, पिता को बचाने दौड़ा बेटा भी नहीं बच सका।एक परिवार के तीन लोगों की मौत के बाद अब जरूरी है कि हादसे के वास्तविक कारणों की निष्पक्ष जांच हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार शहर में बिजली सुरक्षा से जुड़ा एक दर्दनाक हादसा पूरे इलाके को झकझोर गया। घर की बालकनी में लगी लोहे की रेलिंग में करंट फैलने से एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जान चली गई। पहले पिता और बेटे की मौके पर मौत हुई, जबकि गंभीर रूप से झुलसी पत्नी ने रायपुर के निजी अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

घटना शहर के नेहरू चौक के पास सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र की है। मृतकों की पहचान कपड़ा कारोबारी राकेश गुप्ता, उनके बेटे ओम गुप्ता और पत्नी वर्षा गुप्ता के रूप में हुई है।

पिता को बचाने दौड़ा बेटा, दोनों की मौके पर मौत

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार सुबह राकेश गुप्ता अपने घर की बालकनी में पहुंचे और वहां लगी लोहे की रेलिंग के संपर्क में आते ही करंट की चपेट में आ गए। बिजली के प्रवाह के कारण वे रेलिंग से चिपक गए।

पिता को इस हालत में देखकर उनका 24 वर्षीय बेटा ओम उन्हें बचाने दौड़ा, लेकिन वह भी करंट की चपेट में आ गया। हादसे में पिता और बेटे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

पति और बेटे को बचाने पहुंचीं वर्षा, उपचार के दौरान मौत

दोनों को करंट की चपेट में देखकर वर्षा गुप्ता भी उन्हें बचाने पहुंचीं। इस कोशिश में वह गंभीर रूप से झुलस गईं। उन्हें पहले जिला अस्पताल ले जाया गया और बाद में बेहतर उपचार के लिए रायपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। शनिवार को उपचार के दौरान उनकी भी मौत हो गई।

हाईटेंशन लाइन से करंट फैलने की आशंका, जांच जारी

प्रारंभिक जानकारी में घर के आसपास से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन और संभावित शॉर्ट सर्किट को हादसे की वजह माना जा रहा है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि बालकनी की लोहे की रेलिंग में करंट किस परिस्थिति में पहुंचा। अभी हादसे का आधिकारिक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

घरों के आसपास बिजली सुरक्षा पर गंभीर सवाल

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि बिजली सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि किसी मकान की बालकनी की रेलिंग में करंट फैल सकता है, तो यह स्थिति आसपास रहने वाले अन्य लोगों के लिए भी खतरे का संकेत है।

रिहायशी इलाकों में हाईटेंशन बिजली लाइनों की सुरक्षित दूरी, खुले तारों की स्थिति, विद्युत उपकरणों की नियमित जांच और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई जैसे मुद्दों को गंभीरता से लेने की जरूरत है।

जन चौपाल 36 का सवाल: क्या रिहायशी क्षेत्रों में बिजली लाइनों और मकानों के बीच सुरक्षा मानकों की नियमित जांच होती है? क्या ऐसे हादसों को रोकने के लिए बिजली विभाग और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए?

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