रायपुर। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नेता अमित जोगी से जुड़ा सोशल मीडिया वीडियो विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज होने और पुलिस की ओर से नोटिस दिए जाने के बाद छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल ने भी उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जानकारी के मुताबिक, अमित जोगी को सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है।
अधिवक्ता की शिकायत पर बार काउंसिल की कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता बृजेशनाथ पांडेय ने अमित जोगी के खिलाफ छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, नोटिस की सार्वजनिक प्रति और उसमें दर्ज शर्तों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
विवादित वीडियो पर सिविल लाइंस थाने में FIR
इससे पहले भाजपा नेताओं की शिकायत पर रायपुर के सिविल लाइंस थाने में अमित जोगी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े एक विवादित सोशल मीडिया वीडियो को लेकर की गई थी।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 352, 353(2), 356(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस वीडियो तैयार करने से लेकर उसे सोशल मीडिया पर साझा करने तक की पूरी प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। फिलहाल मामले में जांच जारी है और आरोपों पर कोई अंतिम कानूनी निर्णय नहीं आया है।
निवास के बाहर पुलिस ने चस्पा किया था नोटिस
FIR दर्ज होने के बाद सिविल लाइंस पुलिस की टीम अमित जोगी के निवास पर पहुंची थी। वहां पूछताछ के लिए नोटिस चस्पा किया गया और उन्हें जांच में शामिल होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया।पुलिस का नोटिस और स्टेट बार काउंसिल की ओर से जारी बताया जा रहा नोटिस अलग-अलग प्रक्रियाओं से जुड़े हैं। पुलिस की कार्रवाई आपराधिक मामले की जांच का हिस्सा है, जबकि बार काउंसिल की शिकायत अधिवक्ता के पेशेवर आचरण से संबंधित प्रक्रिया के तहत देखी जा सकती है।
‘ज्ञानू-जानू’ वीडियो से शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, अमित जोगी के सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो साझा किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ था। भाजपा नेताओं ने वीडियो की सामग्री पर आपत्ति जताते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त के प्रति अपमानजनक बताया था। इसके बाद भाजपा नेताओं की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया।विवाद बढ़ने के बाद अमित जोगी ने संबंधित पोस्ट हटा दी थी। अपनी सफाई में उन्होंने कहा था कि वीडियो के जरिए वह जो संदेश देना चाहते थे, उस पर उनका विश्वास कायम है, लेकिन उसे पेश करने का तरीका उचित नहीं था। उन्होंने अपनी अभिव्यक्ति के तरीके पर खेद भी जताया था।
सूरत में मौजूदगी की तस्वीरों से बढ़ी थीं चर्चाएं
इसी बीच अमित जोगी के गुजरात के सूरत में होने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आई थीं। इसके बाद उनके रायपुर से बाहर होने को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।हालांकि, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश संगठन महामंत्री निलेश चौहान ने उनके फरार होने की खबरों को भ्रामक बताया था। पार्टी की ओर से कहा गया था कि अमित जोगी का निजी कार्यक्रम पहले से तय था। पार्टी ने यह भी दावा किया था कि वह संबंधित थाने को अपनी स्थिति की जानकारी दे चुके हैं और 9 नवंबर को पुलिस के समक्ष उपस्थित होकर जांच में सहयोग करेंगे।
अब अमित जोगी के जवाब पर टिकी नजर
एक ओर पुलिस वीडियो विवाद की जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्टेट बार काउंसिल के कथित नोटिस के बाद अमित जोगी के जवाब का इंतजार है। इसके बाद परिषद की ओर से आगे की प्रक्रिया तय की जा सकती है।गौरतलब है कि कारण बताओ नोटिस के जरिए संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है। नोटिस जारी होना अपने आप में आरोपों के साबित होने या किसी दंडात्मक कार्रवाई का प्रमाण नहीं है।
