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Sunday, October 25, 2026

Diwali 2026 Date: 8 नवंबर को मनाई जाएगी दिवाली, जानें लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और अमावस्या तिथि

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दीपावली का पर्व नजदीक आते ही घरों में साफ-सफाई, सजावट और त्योहार की तैयारियां तेज हो गई हैं। रोशनी के इस पर्व पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। हालांकि, हर साल की तरह इस बार भी दिवाली की सही तारीख और पूजा के शुभ मुहूर्त को लेकर लोगों के बीच सवाल हैं। पंचांग के अनुसार, साल 2026 में दिवाली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं अमावस्या तिथि, लक्ष्मी पूजन और प्रदोष काल का समय।

अमावस्या तिथि कब शुरू होगी और कब होगी समाप्त?

पंचांग के अनुसार, कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर होगा। दी गई पंचांग गणना के अनुसार, उदया तिथि और मिथिला व महावीर पंचांग की मान्यता के आधार पर 8 नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी।

लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त

दिवाली पर माता लक्ष्मी की पूजा के लिए शाम का समय विशेष महत्व रखता है। दी गई गणना के अनुसार, 8 नवंबर को लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 31 मिनट से रात 7 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। इस तरह पूजा के लिए कुल 1 घंटा 58 मिनट का समय मिलेगा।

इस अवधि को वृषभ लग्न या स्थिर लग्न से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस समय पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है।

प्रदोष काल और निशिता काल का समय

दिवाली के दिन पूजा के लिए प्रदोष काल और निशिता काल का भी महत्व माना जाता है। दी गई पंचांग गणना के अनुसार, इनका समय इस प्रकार है:

  • प्रदोष काल: शाम 5 बजकर 07 मिनट से शाम 7 बजकर 41 मिनट तक।
  • वृषभ काल: शाम 5 बजकर 31 मिनट से रात 7 बजकर 29 मिनट तक।
  • निशिता काल: रात 11 बजकर 07 मिनट से रात 11 बजकर 58 मिनट तक।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निशिता काल में भी लक्ष्मी पूजा की जा सकती है। हालांकि, इस समय पूजा का मुहूर्त स्थिर लग्न से अलग होगा।

प्रदोष काल और वृषभ लग्न का क्या है महत्व?

हिंदू परंपरा में प्रदोष काल को सूर्यास्त के आसपास का महत्वपूर्ण समय माना जाता है। दीपावली पर इस अवधि में माता लक्ष्मी की पूजा करना शुभ समझा जाता है। वहीं, वृषभ लग्न को स्थिर लग्न कहा जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में लक्ष्मी पूजन करने से घर में धन-धान्य और सुख-समृद्धि बनी रहती है।

दिवाली की पूजा के लिए अपने स्थानीय पंचांग और शहर के अनुसार निर्धारित समय की पुष्टि करना उचित रहेगा, क्योंकि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है।

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