SBI पर साइबर हमले और ग्राहकों के निजी डेटा लीक होने की खबर चिंताजनक, केंद्र सरकार जवाब दे — विकास उपाध्याय
रायपुर- प्रेस विज्ञप्ति/21 अक्टूबर 2026
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) पर साइबर हमले और हजारों ग्राहकों के कथित निजी डेटा चोरी होने से जुड़ी सामने आई खबरों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने केंद्र की मोदी सरकार की साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के ग्राहकों का व्यक्तिगत डेटा सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर सरकार के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
विकास उपाध्याय ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी के अनुसार, इस साइबर हमले में 3,897 ग्राहकों का डेटा चोरी होने का दावा किया जा रहा है। कथित तौर पर ग्राहकों के नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, ई-मेल एड्रेस, घर का पता, ऋण संबंधी रिकॉर्ड और ग्राहक पहचान से जुड़ी जानकारियां लीक होने की बात कही जा रही है। यदि इन दावों की पुष्टि होती है, तो यह ग्राहकों की निजता, आर्थिक सुरक्षा और बैंकिंग व्यवस्था पर भरोसे से जुड़ा गंभीर मामला होगा।
उन्होंने कहा कि आज बैंकिंग से लेकर सरकारी सेवाओं तक आम नागरिकों का व्यक्तिगत डेटा डिजिटल माध्यमों पर उपलब्ध है। ऐसे में साइबर सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक लोगों को वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और अन्य ऑनलाइन अपराधों के जोखिम में डाल सकती है। सरकार की जिम्मेदारी केवल डिजिटल सेवाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि नागरिकों के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।
विकास उपाध्याय ने केंद्र सरकार से मांग की कि—
- SBI पर कथित साइबर हमले और डेटा लीक के मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- डेटा चोरी की वास्तविक स्थिति, प्रभावित ग्राहकों की संख्या और लीक हुई जानकारी के प्रकार पर आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया जाए।
- प्रभावित ग्राहकों को समय रहते सूचित कर उनकी बैंकिंग और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
- साइबर सुरक्षा में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
- भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए बैंकों की साइबर सुरक्षा व्यवस्था का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा किसी राजनीतिक प्रचार का विषय नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और करोड़ों नागरिकों के विश्वास से जुड़ा मुद्दा है। सरकार को इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए तथ्यों के साथ देश के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
विकास उपाध्याय ने कहा कि नागरिकों की मेहनत की कमाई और निजी जानकारी की सुरक्षा सर्वोपरि है। सरकार को जवाबदेही तय करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि डिजिटल इंडिया के दौर में आम नागरिक साइबर अपराधियों के भरोसे न छोड़ दिए जाएं।


