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Thursday, October 29, 2026
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महासमुंद में सरकारी योजना के 91 लाख रुपये पर सवाल: दो बच्चों की 14 बार शादी दिखाने का आरोप, 7 दिन की जांच 3 साल बाद भी अधूरी

महासमुंद :  सरकारी योजना से जुड़ा कथित फर्जीवाड़ा अब जांच प्रक्रिया की सुस्ती को लेकर भी सवालों में है। आरोप है कि दो बच्चों की अलग-अलग रिकॉर्ड में कुल 14 बार शादी दर्ज कराकर करीब 91 लाख रुपये की सरकारी सहायता राशि निकाल ली गई। मामला सामने आने के बाद अधिकारियों ने सात दिन के भीतर जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे, लेकिन करीब तीन साल गुजरने के बाद भी प्रकरण किसी अंतिम निष्कर्ष तक नही पहुंच सका।

रिकॉर्ड में बार-बार शादी की एंट्री का दावा

मामला सरकारी योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता से जुड़ा बताया जा रहा है। उपलब्ध दस्तावेजों की जांच में कथित तौर पर ऐसी प्रविष्टियां सामने आईं, जिनमें एक ही लाभार्थी या उससे जुड़े लोगों के नाम का अलग-अलग रिकॉर्ड में बार-बार इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।सबसे हैरान करने वाली बात दो बच्चों की कुल 14 बार शादी दिखाए जाने से जुड़ी बताई जा रही है। इसी आधार पर करीब 91 लाख रुपये की राशि निकाले जाने का आरोप है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते है तो लाभार्थी सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ सकते है।

सात दिन में रिपोर्ट का आदेश, फिर क्यों बढ़ता गया मामला?

प्रकरण सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने जांच के निर्देश जारी किए थे। शुरुआती आदेश में जांच टीम को सात दिन के भीतर दस्तावेजों और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था।लेकिन तय समय सीमा में जांच पूरी नही हो सकी। इसके बाद मामले की जांच के लिए अलग-अलग स्तर पर कमेटियां गठित होती रहीं। समय बीतता गया और करीब तीन साल बाद भी जांच का अंतिम निष्कर्ष सामने नही आ सका।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस मामले में सात दिन में रिपोर्ट मांगी गई थी, उसकी जांच वर्षों तक लंबित कैसे रही।

91 लाख रुपये के भुगतान की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में

करीब 91 लाख रुपये की राशि निकाले जाने के आरोप के कारण भुगतान की पूरी प्रक्रिया की जांच अहम हो गई है। अधिकारियों को यह देखना होगा कि लाभार्थियों की पात्रता और दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ था।जांच में आवेदन पत्र, लाभार्थियों के रिकॉर्ड, स्वीकृति आदेश, भुगतान संबंधी दस्तावेज और बैंक खातों की जानकारी का मिलान किया जा सकता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि राशि किन लोगों के खातों में गई और भुगतान को मंजूरी किस स्तर से मिली।

एक ही तरह की प्रविष्टियां फिर भी निगरानी तंत्र कैसे चूक गया?

सरकारी योजनाओं में लाभार्थियों की पहचान और पात्रता जांचने के लिए कई स्तरों पर प्रक्रिया तय रहती है। ऐसे में यदि एक ही तरह की जानकारी या संबंधित नामों का बार-बार इस्तेमाल हुआ है तो यह भी जांच का अहम बिंदु है कि रिकॉर्ड जांचने वाले स्तर पर इसे समय रहते क्यों नही पकड़ा गया।दो बच्चों की 14 बार शादी दिखाए जाने का आरोप केवल कथित आर्थिक अनियमितता तक सीमित नही है। इससे दस्तावेज सत्यापन, निगरानी और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था पर भी सवाल उठते है।

जांच पूरी होने पर ही साफ होगी असली तस्वीर

फिलहाल पूरे मामले में जांच के अंतिम निष्कर्ष का इंतजार है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि करीब 91 लाख रुपये के भुगतान में वास्तविक अनियमितता कितनी हुई, रिकॉर्ड में गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।करीब तीन साल से लंबित इस प्रकरण में अब निगाह इस बात पर है कि जांच कब पूरी होती है और उसके आधार पर आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

बिलासपुर हाईकोर्ट का अनुकंपा नियुक्ति मामले में अहम आदेश, मृत कर्मचारी की बहू के आवेदन पर 40 दिन में फैसला करना होगा

बिलासपुर :  अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में हाईकोर्ट ने लंबित आवेदन को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। जल संसाधन विभाग के दिवंगत कर्मचारी की बहू ने नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन लंबे समय तक उस पर कोई अंतिम निर्णय नही हुआ। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने संबंधित सक्षम अधिकारी को आवेदन का नियमों के आधार पर परीक्षण कर 40 दिन के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है।

लंबे समय से विभाग में लंबित था आवेदन

मामला जल संसाधन विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी की मृत्यु के बाद उनके परिवार की ओर से अनुकंपा नियुक्ति के लिए किए गए आवेदन से जुड़ा है। कर्मचारी की बहू ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत विभाग के समक्ष नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था।आवेदन जमा होने के बाद भी विभाग की ओर से लंबे समय तक कोई अंतिम निर्णय नही लिया गया। लगातार इंतजार के बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया और बताया कि उनका आवेदन संबंधित अधिकारियों के पास विचाराधीन है, लेकिन काफी समय बीतने के बावजूद उस पर फैसला नही हुआ है।

हाईकोर्ट ने 40 दिन में निर्णय लेने को कहा

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने लंबित आवेदन की स्थिति को ध्यान में रखा। कोर्ट ने नियुक्ति को लेकर सीधे कोई आदेश जारी करने के बजाय सक्षम अधिकारी को आवेदन पर लागू नियमों और प्रावधानों के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया।अदालत ने कहा कि संबंधित अधिकारी याचिकाकर्ता के आवेदन के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों और अनुकंपा नियुक्ति के लिए निर्धारित नियमों का परीक्षण करे। इसके बाद नियमानुसार उचित निर्णय लिया जाए। इसके लिए कोर्ट ने 40 दिन की समय-सीमा निर्धारित की है।

कोर्ट ने सीधे नियुक्ति का आदेश नही दिया

हाईकोर्ट के आदेश का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अदालत ने याचिकाकर्ता को सीधे अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश नही दिया है। कोर्ट ने केवल विभाग को आवेदन पर नियमों के अनुसार निर्णय लेने के लिए कहा है।इसका मतलब है कि याचिकाकर्ता की पात्रता, दस्तावेज और नियुक्ति से जुड़ी अन्य शर्तों की जांच विभागीय स्तर पर होगी। अंतिम निर्णय संबंधित नियमों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर सक्षम अधिकारी को लेना होगा।

अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य क्या है?

अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान सामान्य तौर पर ऐसे शासकीय कर्मचारी के आश्रित परिवार को राहत देने के लिए होता है, जिसकी सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो जाती है। इसका उद्देश्य परिवार के सामने पैदा होने वाली तत्काल आर्थिक कठिनाई को कम करना होता है।हालांकि, ऐसी नियुक्ति स्वत: मिलने वाला अधिकार नही होती। इसके लिए संबंधित शासन के नियम, पात्रता और निर्धारित शर्तें लागू होती है। इसलिए प्रत्येक मामले में विभाग को उपलब्ध दस्तावेजों और लागू प्रावधानों के आधार पर निर्णय लेना होता है।

अब विभाग के सामने तय समय में फैसला लेने की जिम्मेदारी

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब जल संसाधन विभाग के सक्षम अधिकारी को याचिकाकर्ता के लंबित आवेदन पर 40 दिन के भीतर नियमानुसार निर्णय करना होगा। लंबे समय से निर्णय का इंतजार कर रही याचिकाकर्ता की याचिका का निपटारा भी इसी निर्देश के साथ किया गया है।अब आगे की प्रक्रिया में विभागीय जांच और नियमों के तहत पात्रता का परीक्षण महत्वपूर्ण रहेगा, जिसके बाद आवेदन पर अंतिम निर्णय सामने आएगा।

छत्तीसगढ़ में जूनियर डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, ओपीडी का बहिष्कार कर धरनास्थल पर ही मरीजों का इलाज

रायपुर : छत्तीसगढ़ के अलग अलग मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टर गुरुवार से अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। रायपुर स्थित अंबेडकर अस्पताल और नेहरू मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने नियमित ओपीडी से खुद को अलग रखा, लेकिन मरीजों की परेशानी को देखते हुए धरनास्थल पर ही वैकल्पिक ओपीडी शुरू कर दी।

अस्पताल की ओपीडी छोड़ी, कैंटीन के सामने मरीजों की जांच शुरू

हड़ताल के दौरान मेडिकल कॉलेज की कैंटीन के सामने जूनियर डॉक्टरों ने मरीजों की जांच की। यहां मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श देने के साथ जरूरत के अनुसार उपचार भी उपलब्ध कराया गया। डॉक्टरों का कहना है कि आंदोलन के बावजूद मरीजों को इलाज के लिए भटकना न पड़े, इसलिए समानांतर ओपीडी संचालित की जा रही है।इस आंदोलन में इंटर्न, पीजी रेजिडेंट, पोस्ट पीजी, पीजी बॉन्डेड और एमबीबीएस बॉन्डेड डॉक्टर शामिल हैं।

स्वास्थ्य मंत्री से बातचीत के बाद शासन को सौंपा मांगों का प्रस्ताव

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के मुताबिक, अपनी मांगों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के साथ चर्चा हो चुकी है। बातचीत के दौरान शासन की ओर से डॉक्टरों से उनकी मांगों का लिखित प्रस्ताव मांगा गया था। एसोसिएशन का कहना है कि प्रस्ताव शासन को सौंपा जा चुका है, लेकिन अब तक मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।

स्टाइपेंड से लेकर पीजी बॉन्ड तक, डॉक्टरों की प्रमुख मांगें क्या हैं

जूनियर डॉक्टरों की मांगों में एमबीबीएस के बाद पीजी और पोस्ट पीजी करने वाले डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी शामिल है। इसके अलावा पीजी बॉन्ड को लेकर भी डॉक्टरों ने बदलाव की मांग रखी है।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पति को काले रंग और मोटे शरीर वाला कहने के आरोप को तलाक का आधार नहीं माना

छत्तीसगढ़ : हाई कोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पति की अपील खारिज कर दी। पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी उसे काले रंग और मोटे शरीर वाला कहकर अपमानित करती थी। अदालत ने कहा कि इस तरह के आरोप, जब ठोस साक्ष्य से साबित न हों, अपने आप में तलाक की डिक्री देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं बनते।

फैमिली कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट ने रखा बरकरार

जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें पति की तलाक की याचिका खारिज की गई थी। वहीं पत्नी की ओर से दायर स्त्रीधन वापस करने की मांग को स्वीकार किया गया था।हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद 25 जून को फैसला सुरक्षित रखा था। इसके बाद 18 सितंबर को अदालत ने अपना निर्णय सुनाया।

2019 में हुई थी शादी, कुछ महीने बाद अलग रहने लगी पत्नी

मामला जांजगीर चांपा जिले के 28 वर्षीय अक्ष घोष और रायगढ़ जिले की 25 वर्षीय पूजा सीत से जुड़ा है। दोनों की शादी 7 मार्च 2019 को रायगढ़ जिले के एक गांव में हुई थी। शादी के बाद महिला करीब दो से तीन महीने तक पति और उसके परिवार के साथ रही।पति का आरोप था कि इस दौरान पत्नी का व्यवहार उसके प्रति ठीक नहीं था। उसने पत्नी पर झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देने और बार बार मायके जाने का आरोप लगाया। पति के मुताबिक, पत्नी उसकी अनुमति के बिना एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने राजस्थान चली गई और करीब 25 दिन बाद वापस लौटी।पति ने यह भी दावा किया कि इसके बाद उसकी पत्नी का जुड़वां बच्चों का गर्भपात हो गया। उसका कहना था कि इसके बाद महिला की मां उसे रायगढ़ ले गई और कई प्रयासों के बावजूद वह वापस ससुराल नहीं आई।

पत्नी ने पति पर लगाए अलग आरोप, अवैध संबंध और दुर्व्यवहार का किया दावा

पत्नी ने शादी होने की बात को स्वीकार करते हुए पति की ओर से लगाए गए अन्य आरोपों से इनकार किया। उसका आरोप था कि पति का किसी दूसरी महिला के साथ अवैध संबंध था। पत्नी के मुताबिक, इस जानकारी के बाद पति ने शराब का सेवन शुरू कर दिया और उसके साथ दुर्व्यवहार करने लगा।महिला ने यह भी कहा कि गर्भावस्था के दौरान उसे उचित इलाज नहीं दिया गया। बीमार होने पर उसकी मां उसे रायगढ़ के अस्पताल लेकर गई थी। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उसने पति और उसके परिवार से उसे वापस ले जाने के लिए कहा, लेकिन उनका कहना था कि उसे वापस नहीं ले जाया गया।इसके बाद 24 फरवरी 2020 को महिला की मां ने रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। महिला ने घरेलू हिंसा कानून के तहत पति और उसके परिवार के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में भी कार्रवाई शुरू की थी।

ठोस सबूत नहीं मिलने पर पति के दावों को अदालत ने नहीं माना

मामले में उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि पति अपनी पत्नी की ओर से क्रूरता और परित्याग किए जाने के आरोपों को प्रमाणित नहीं कर सका। अदालत के मुताबिक, पति ने कई आरोप लगाए, लेकिन उन्हें साबित करने के लिए पर्याप्त ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए गए।अदालत ने विशेष रूप से पति को काले रंग या मोटे शरीर वाला कहे जाने के आरोप पर भी विचार किया। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इस तरह का आरोप तलाक की डिक्री देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।

पत्नी के अलग रहने को भी बिना उचित कारण के परित्याग साबित नहीं किया जा सका

हाई कोर्ट ने यह भी माना कि पति यह साबित करने में सफल नहीं रहा कि पत्नी बिना किसी उचित कारण के अपने माता पिता के साथ रह रही थी। साथ ही वह यह भी प्रमाणित नहीं कर सका कि पत्नी ने वैवाहिक संबंध पूरी तरह समाप्त करने की मंशा से उसे छोड़ दिया था।इन परिस्थितियों में हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही माना और पति की तलाक संबंधी अपील खारिज कर दी। अदालत ने बिना किसी लागत के अपील खारिज करते हुए डिक्री तैयार करने का निर्देश दिया।

छत्तीसगढ़ में फिर बदला मौसम का मिजाज, रायपुर समेत कई इलाकों में झमाझम बारिश से गिरा तापमान, तेज हवाओं का भी अलर्ट

रायपुर : छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में मौसम एक बार फिर करवट ले रहा है। बंगाल की खाड़ी से सक्रिय मौसम प्रणाली के प्रभाव से गुरुवार को दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में बारिश हुई। राजधानी रायपुर में भी दिनभर मौसम बदला रहा और कई जगहों पर तेज बारिश देखने को मिली।बारिश के कारण तापमान में करीब 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। इससे पिछले कुछ दिनों से गर्मी और उमस झेल रहे लोगों को राहत मिली।

दक्षिण छत्तीसगढ़ में कई जगह हुई बारिश, कुछ इलाकों में भारी बारिश

पिछले 24 घंटे के दौरान दक्षिण छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हुई। लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में मौसम सुहावना हो गया और तापमान में भी कमी आई।मौसम विभाग ने 25 सितंबर को रायपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है।

बंगाल की खाड़ी की मौसम प्रणाली लगातार बढ़ रही आगे

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश और उससे सटे दक्षिण ओडिशा के ऊपर बना डीप डिप्रेशन करीब 10 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा था। 24 सितंबर की सुबह 11:30 बजे यह 18.7 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 83.4 डिग्री पूर्वी देशांतर के आसपास केंद्रित था।इस मौसम प्रणाली के आगे बढ़ने के साथ छत्तीसगढ़ में भी इसका प्रभाव दिखाई दे रहा है। विभाग के मुताबिक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर आगे भी जारी रह सकता है।

बारिश के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं

मौसम विभाग ने बारिश के साथ कुछ इलाकों में तेज हवाओं को लेकर भी चेतावनी जारी की है। अगले 24 घंटे के दौरान कुछ स्थानों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। ऐसे में मौसम खराब होने के दौरान लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

प्रदेश में अब तक सामान्य से 6 फीसदी कम बारिश दर्ज

बारिश का दौर जारी रहने के बावजूद छत्तीसगढ़ में अब तक कुल बारिश सामान्य आंकड़े से करीब 6 फीसदी कम दर्ज की गई है। आने वाले दिनों में सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण होने वाली बारिश से इस अंतर में बदलाव की संभावना बनी हुई है।फिलहाल मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

आरपीएफ राइजिंग डे और रेलमंत्री के दौरे से पहले बदलेगा रायपुर स्टेशन का नजारा, चार करोड़ के काम ने पकड़ी रफ्तार

रायपुर : रेलवे स्टेशन पर इन दिनों तैयारियां तेज हो गई हैं। आरपीएफ राइजिंग डे और रेलमंत्री के प्रस्तावित दौरे को देखते हुए स्टेशन परिसर में मरम्मत, साफ सफाई, रंग रोगन और यात्री सुविधाओं से जुड़े कई काम कराए जा रहे हैं। रेलवे प्रशासन का प्रयास है कि कार्यक्रम से पहले स्टेशन का पूरा परिसर व्यवस्थित और बेहतर नजर आए।

एक करोड़ के नियमित मेंटेनेंस के मुकाबले चार करोड़ के विशेष काम

स्टेशन के नियमित रखरखाव के लिए हर साल करीब एक करोड़ रुपये का फंड होने की बात सामने आई है। वहीं इस बार स्टेशन की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और परिसर को बेहतर बनाने के लिए करीब चार करोड़ रुपये के विभिन्न कार्य कराए जा रहे हैं।इस अतिरिक्त खर्च को लेकर चर्चा भी शुरू हो गई है। नियमित रखरखाव के लिए निर्धारित राशि और मौजूदा विशेष कार्यों पर खर्च होने वाली रकम के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

प्लेटफॉर्म से मुख्य प्रवेश द्वार तक चल रहा काम

रेलवे प्रशासन ने स्टेशन की अलग अलग व्यवस्थाओं के लिए संबंधित विभागों और एजेंसियों को जिम्मेदारी दी है। प्लेटफॉर्म, मुख्य प्रवेश द्वार और स्टेशन के अन्य हिस्सों में साफ सफाई के साथ मरम्मत का काम चल रहा है।जहां दीवारों या अन्य हिस्सों में टूट फूट है, वहां सुधार किया जा रहा है। कई स्थानों पर रंग रोगन का काम भी जारी है। रेलमंत्री के प्रस्तावित दौरे को देखते हुए कार्यों की गति बढ़ाई गई है।

यात्रियों की सुविधाओं पर भी दिया जा रहा है ध्यान

सिर्फ स्टेशन की बाहरी सुंदरता पर ही नहीं, बल्कि यात्रियों से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी काम किया जा रहा है। प्रतीक्षालय, प्लेटफॉर्म, संकेतक, रोशनी, पेयजल और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने की प्रक्रिया चल रही है।स्टेशन के उन हिस्सों की भी मरम्मत की जा रही है, जिन्हें लंबे समय से सुधार की जरूरत थी। अधिकारियों की निगरानी में इन कामों को तय समय सीमा के भीतर पूरा कराने की कोशिश की जा रही है।

आरपीएफ राइजिंग डे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था भी होगी पुख्ता

आरपीएफ राइजिंग डे के कार्यक्रम को लेकर रेलवे सुरक्षा बल भी अपनी तैयारियों में जुटा है। वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों और अन्य अतिथियों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए स्टेशन परिसर और आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।रेलवे प्रशासन की कोशिश है कि कार्यक्रम के दौरान यात्रियों और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

चार करोड़ के खर्च के साथ बदलने जा रहा स्टेशन का स्वरूप

फिलहाल रायपुर रेलवे स्टेशन पर एक साथ कई स्तरों पर काम चल रहा है। प्रशासन का जोर समय पर मरम्मत और यात्री सुविधाओं से जुड़े कार्य पूरे करने पर है। आरपीएफ राइजिंग डे और रेलमंत्री के प्रस्तावित दौरे से पहले स्टेशन का बदला हुआ स्वरूप दिखाई देने की उम्मीद है।हालांकि करीब एक करोड़ रुपये के वार्षिक नियमित मेंटेनेंस फंड की तुलना में इस बार करीब चार करोड़ रुपये के विशेष कार्य कराए जाने से खर्च और रखरखाव की व्यवस्था भी चर्चा में बनी हुई है।

अनंत चतुर्दशी पर आज ऐसे करें गणपति विसर्जन, शुभ मुहूर्त से लेकर पूरी पूजा विधि यहां जानिए

Anant Chaturdashi Puja Vidhi:   गणेश चतुर्थी के 12 दिवसीय उत्सव का आज शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को समापन हो रहा है। अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ मुहूर्त में विधि विधान से विसर्जन करने से भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख शांति की कामना की जाती है।अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन 14 गांठ वाला अनंत सूत्र बांधने की परंपरा है। पुरुष इसे दाहिने हाथ और महिलाएं बाएं हाथ में बांधती हैं।

गणेश विसर्जन के लिए आज ये शुभ समय रहेंगे

25 सितंबर को गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए दिन में कई शुभ समय बताए गए हैं। पूजा और विसर्जन की तैयारी करने वाले भक्त इन समयों के अनुसार अपनी सुविधा से कार्यक्रम तय कर सकते हैं।

  • सुबह का मुहूर्त: सुबह 6:11 बजे से 10:42 बजे तक
  • दोपहर का शुभ समय: दोपहर 12:13 बजे से 1:44 बजे तक
  • शाम का मुहूर्त: शाम 4:45 बजे से 6:15 बजे तक
  • रात का मुहूर्त: रात 9:14 बजे से 10:44 बजे तक

कब शुरू हुई और कब खत्म होगी अनंत चतुर्दशी की तिथि

पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर 2026 की रात 11:18 बजे शुरू हुई और 25 सितंबर की रात 11:06 बजे समाप्त होगी। इसी वजह से अनंत चतुर्दशी का व्रत और धार्मिक अनुष्ठान 25 सितंबर को किया जा रहा है।

विसर्जन से पहले इस तरह करें गणपति बप्पा की पूजा

गणेश विसर्जन से पहले भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करना शुभ माना जाता है। इसके लिए सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल की सफाई करें और गणपति बप्पा की पूजा करें।भगवान गणेश को सिंदूर, अक्षत, दूर्वा और फूल अर्पित करें। इसके बाद मोदक या अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य प्रसाद का भोग लगाएं। पूजा पूरी होने के बाद कपूर से आरती करें और जाने अनजाने में हुई किसी भूल के लिए भगवान गणेश से क्षमा प्रार्थना करें।

विसर्जन से पहले बप्पा के साथ रखें ये चीजें

प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाने से पहले लाल या पीले कपड़े में अक्षत, पंचमेवा, मोदक, सुपारी और दक्षिणा रखकर छोटी पोटली तैयार कर सकते हैं। इसे गणेश जी के साथ रखने की परंपरा कई परिवारों में निभाई जाती है।इसके बाद श्रद्धालु गणपति बप्पा की प्रतिमा को सम्मानपूर्वक उठाकर विसर्जन स्थल की ओर ले जाते हैं।

जयकारे के साथ करें गणेश प्रतिमा का विसर्जन

विसर्जन के दौरान भक्त गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ जैसे जयकारे लगाते हुए प्रतिमा को विसर्जन स्थल तक ले जाते हैं। वहां पहुंचने के बाद श्रद्धा के साथ अंतिम आरती करें और इसके बाद स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित सुरक्षित स्थान और प्रक्रिया के अनुसार प्रतिमा का विसर्जन करें।धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए जल स्रोतों की स्वच्छता और स्थानीय नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी है।

गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान प्रशिक्षु DSP से मारपीट, निजी कार में तोड़फोड़ के बाद 6 आरोपी गिरफ्तार

अंबिकापुर :  गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान विवाद ने अचानक गंभीर रूप ले लिया। मणिपुर थाना क्षेत्र के जगदीशपुर में प्रशिक्षु DSP निशांत कुर्रे के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और उनकी निजी कार में तोड़फोड़ कर दी गई। बताया जा रहा है कि रास्ते में गाड़ी को साइड देने को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हाथापाई तक पहुंच गया।

गाड़ी को रास्ता देने की बात पर शुरू हुआ विवाद

जानकारी के मुताबिक गणेश विसर्जन का जुलूस जगदीशपुर इलाके से गुजर रहा था। इसी दौरान प्रशिक्षु DSP निशांत कुर्रे अपनी निजी कार से वहां से निकल रहे थे। रास्ता देने को लेकर कुछ युवकों के साथ उनकी कहासुनी हो गई।आरोप है कि बहस बढ़ने के बाद युवकों ने DSP के साथ मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान उनकी निजी कार को भी नुकसान पहुंचाया गया। घटना के बाद इलाके में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस

घटना के बाद प्रशिक्षु DSP ने वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और घटनाक्रम की जानकारी जुटाई।बताया गया है कि निशांत कुर्रे सरगुजा जिले के दरिमा थाना में प्रशिक्षु DSP के तौर पर पदस्थ हैं। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की तलाश शुरू की।

मामले में 6 लोगों को पकड़ा गया

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब पकड़े गए लोगों से पूछताछ कर रही है ताकि विवाद की पूरी वजह और घटनाक्रम से जुड़ी अन्य जानकारी सामने आ सके।प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से यह भी बताया जा रहा है कि घटना के समय कुछ युवक नशे की हालत में थे। हालांकि इस संबंध में पुलिस की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल

गणेश विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और जुलूस में शामिल लोग सड़कों पर मौजूद थे। ऐसे में रास्ते को लेकर हुआ विवाद गंभीर घटना में बदल गया। पुलिस अब मारपीट और वाहन में हुई तोड़फोड़ से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

छत्तीसगढ़ में MBBS इंटर्न्स की बड़ी मांग पूरी, अब हर महीने मिलेगा 25 हजार रुपये स्टाइपेंड

छत्तीसगढ़ :  सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS इंटर्न्स के लिए राहत की खबर है। राज्य सरकार ने लंबे समय से चली आ रही स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को मंजूरी दे दी है। चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के बाद अब सरकारी मेडिकल कॉलेजों के MBBS इंटर्न्स को हर महीने 25 हजार रुपये स्टाइपेंड मिलेगा।नया स्टाइपेंड 1 अक्टूबर 2026 से लागू किया जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद इंटर्न डॉक्टरों और जूनियर डॉक्टरों की स्टाइपेंड व वेतन से जुड़ी मांग को लेकर चल रहा आंदोलन भी खत्म हो गया है।

महीने की आय में अब सीधे होगी बढ़ोतरी

राज्य के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में MBBS इंटर्न्स को अब तक अपेक्षाकृत कम स्टाइपेंड दिया जा रहा था। लंबे समय से डॉक्टर इसे बढ़ाने की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि दूसरे राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ में इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाली राशि कम है।अब सरकार के नए आदेश के बाद इंटर्न्स को हर महीने 25 हजार रुपये मिलेंगे। इससे इंटर्नशिप कर रहे मेडिकल छात्रों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

1 अक्टूबर से मिलेगा बढ़ा हुआ स्टाइपेंड

चिकित्सा शिक्षा विभाग के आदेश के मुताबिक संशोधित स्टाइपेंड की व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी। यानी अक्टूबर महीने से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS इंटर्नशिप कर रहे छात्रों को नई दर के अनुसार भुगतान किया जाएगा।

मंत्री से मुलाकात के बाद आया फैसला

इंटर्न डॉक्टरों की मांग को लेकर स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने डॉक्टरों से मुलाकात की थी। इसके बाद स्टाइपेंड बढ़ाने की दिशा में निर्णय लिया गया और अब विभाग की ओर से औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया है।

आंदोलन के बाद सरकार ने जारी किया आदेश

स्टाइपेंड में संशोधन की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टर और जूनियर डॉक्टर लगातार सरकार के सामने अपनी बात रख रहे थे। डॉक्टरों का कहना था कि मांगों पर पहले आश्वासन मिलने के बावजूद जब आदेश जारी नहीं हुआ, तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।अब स्टाइपेंड बढ़ाने का आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद डॉक्टरों की प्रमुख मांग पूरी हो गई है। सरकार के इस फैसले से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS इंटर्नशिप कर रहे छात्रों को सीधे आर्थिक लाभ मिलेगा।