21.3 C
Raipur
Friday, October 30, 2026
Home Blog Page 243

बलौदाबाजार में अफसर कॉलोनी में चोरी, तहसीलदार-पटवारी समेत 7 घरों के ताले टूटे

एडिशनल एसपी और एसडीओपी के आवासीय क्षेत्र में वारदात, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

बलौदाबाजार/भाटापारा /छत्तीसगढ़/21/09/2025

जिले के भाटापारा स्थित जे.डी. कॉलोनी शनिवार रात चोरी की बड़ी वारदात से दहल गई। यह कॉलोनी प्रशासनिक अफसरों और कर्मचारियों का रिहायशी इलाका है, जिसे अब तक सबसे सुरक्षित माना जाता था। लेकिन इसी कॉलोनी में अज्ञात चोरों ने धावा बोलते हुए एक ही रात में सात घरों के ताले तोड़ डाले।सुबह जब कॉलोनी के लोग उठे तो दरवाजों पर टूटे ताले और बिखरा सामान देखकर हड़कंप मच गया। हैरानी की बात यह रही कि जिन मकानों को निशाना बनाया गया उनमें तहसीलदार और पटवारी जैसे राजस्व अधिकारियों के घर भी शामिल थे।

सुरक्षा दायरे में भी वारदात

यह कॉलोनी एडिशनल एसपी और एसडीओपी के आवासीय क्षेत्र से सटी हुई है। बावजूद इसके, इतनी बड़ी वारदात होना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि चोर पहले से इलाके की रेकी कर चुके थे और बेहद सफाई से चोरी को अंजाम देकर फरार हो गए।

सुबह फैला हड़कंप
चोरी का पता तब चला जब सुबह लोग बाहर निकले। उन्होंने देखा कि कई मकानों के ताले टूटे हुए हैं और घरों का सामान अस्त-व्यस्त पड़ा है। परिवारों ने आशंका जताई कि चोर देर रात ही घुसपैठ कर गए थे और उन्हें जगाए बिना सब कुछ ले उड़े।

पुलिस की जांच शुरू, CCTV खंगाले जा रहे
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और जल्द ही आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी की जाएगी।

लोगों में दहशत और नाराजगी
इस घटना ने कॉलोनी के लोगों में दहशत का माहौल बना दिया है। निवासियों ने कहा कि अगर अफसरों और पुलिस अधिकारियों के घरों के आसपास भी चोर वारदात कर सकते हैं, तो आम जनता खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करेगी। उन्होंने रात की पुलिस गश्त और निगरानी व्यवस्था पर भी नाराजगी जताई है।

कितना नुकसान हुआ, अभी साफ नहीं
अब तक किसी भी पीड़ित परिवार ने चोरी गए कैश और जेवरात का आधिकारिक ब्यौरा नहीं दिया है। हालांकि अनुमान लगाया जा रहा है कि चोरी की रकम और सामान की कीमत लाखों में हो सकती है।

कवर्धा पत्रकार पर हमला: पत्रकारों के विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई, फैक्ट्री संचालक गिरफ्तार

पत्रकार यदि कवरेज नहीं करेंगे तो जनता तक सच्चाई कैसे पहुंचेगी? क्या यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने और खत्म करने का प्रयास नहीं है? यह मामला सिर्फ एक पत्रकार का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आवाज को कुचलने का गंभीर प्रयास है।

कवर्धा/छत्तीसगढ़ | 22 सितम्बर 2025_
दीपक पाण्डेय/जन_चौपाल 36

घटना का पृष्ठभूमि
कवर्धा जिले में पत्रकार संजय यादव पर हुए हमले ने पूरे मीडिया जगत को झकझोर कर रख दिया। बताया जा रहा है कि छीरपानी बॉटलिंग यूनिट में कवरेज के दौरान रिपोर्टर और कैमरामैन पर जानलेवा हमला किया गया। मारपीट और लूटपाट की इस घटना से पत्रकार साथी किसी तरह जान बचाकर भागे।

आरोप फैक्ट्री संचालक पर
हमले के पीछे एसजीएम फैक्ट्री संचालक संदीप गुप्ता और उनके सहयोगी गणेश गुप्ता पर दबंगई और गुंडागर्दी के आरोप लगे। पत्रकारों का कहना है कि फैक्ट्री मालिकों ने कवरेज रोकने और डराने-धमकाने की मंशा से हमला करवाया।

पुलिस की भूमिका पर सवाल
सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि पुलिस ने मामले को दबाने की कोशिश की और एफआईआर दर्ज करने में 6 घंटे लगा दिए। इससे पत्रकारों का गुस्सा और भड़क गया।

पत्रकारों का विरोध और दबाव
घटना के अगले दिन जिलेभर के पत्रकार शहीद स्मारक उद्यान में धरने पर बैठ गए। प्रशासन को पत्रकारों की मांगों पर प्रतिक्रिया देने में पूरे 5 घंटे लग गए, जबकि धरना स्थल जिला मुख्यालय से केवल 1 किमी दूर था। पत्रकारों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सोमवार दोपहर 1 बजे तक गिरफ्तारी नहीं हुई तो प्रदेशभर के पत्रकार कवर्धा में इकट्ठा होकर अनिश्चितकालीन आंदोलन और राष्ट्रीय राजमार्ग चक्का जाम करेंगे।

पुलिस की कार्रवाई
बढ़ते दबाव और जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर सिटी कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री संचालक संदीप गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया।

पत्रकार संघ की मांग
पत्रकार संजय यादव पर दर्ज फर्जी एफआईआर तत्काल रद्द हो।
छीरपानी बॉटलिंग यूनिट और जी.एस. मसाला कंपनी की निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
संदीप गुप्ता और गणेश गुप्ता को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया जाए।
यदि संजय यादव या उनके परिवार को कोई नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी आरोपियों की होगी।

बड़ा सवाल
पत्रकार यदि कवरेज नहीं करेंगे तो जनता तक सच्चाई कैसे पहुंचेगी? क्या यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने और खत्म करने का प्रयास नहीं है? यह मामला सिर्फ एक पत्रकार का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आवाज को कुचलने का गंभीर प्रयास है।




अंतरराष्ट्रीय सीमा पर चौथी बार संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन

हथियार या ड्रग्स की सप्लाई का शक, BSF ने चलाया सर्च ऑपरेशन

जम्मू।भारत:_22/09/2025

जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे इलाकों में एक बार फिर पाकिस्तानी ड्रोन की गतिविधि ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। शनिवार शाम करीब 7 बजे आरएस पुरा सेक्टर के एक गाँव के पास भारतीय सीमा में संदिग्ध ड्रोन मंडराते देखा गया। यह घटना इस महीने की चौथी घुसपैठ मानी जा रही है।

हथियार या नशीली खेप की आशंका
सीमा सुरक्षा बल (BSF) अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन के जरिए हथियारों या नशीले पदार्थों की सप्लाई की आशंका है। संभावित खेप का पता लगाने और इलाके को सुरक्षित बनाने के लिए रातभर तलाशी अभियान चलाया गया। अधिकारियों ने कहा कि हर संभावना की जांच की जा रही है, ताकि यह साफ हो सके कि ड्रोन ने कोई गिरावट की है या नहीं।

सितंबर में लगातार चार बार घुसपैठ
16 सितंबर: आरएस पुरा सेक्टर में संदिग्ध ड्रोन गतिविधि के बाद तलाशी में एके-सीरीज की असॉल्ट राइफल और एक मैगज़ीन बरामद हुई थी।
13 सितंबर: अखनूर इलाके में राज्य पुलिस ने थर्मल पेलोड से लैस एक ड्रोन पकड़ा था।

6 सितंबर: सांबा जिले में सैन्य छावनी के ऊपर संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखा गया, जिसके बाद व्यापक सर्च ऑपरेशन चला।
21 सितंबर: आरएस पुरा सेक्टर में चौथी बार ड्रोन देखा गया।

सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ी
ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स की सप्लाई पाकिस्तान की पुरानी रणनीति रही है। बढ़ती घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। बीएसएफ ने सीमा पर निगरानी और सख्त कर दी है। साथ ही, स्थानीय लोगों को भी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत देने के लिए कहा गया है।

पाकिस्तान की नापाक कोशिशें जारी
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाएँ पाकिस्तान की ओर से अशांति फैलाने और आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट देने की कोशिश का हिस्सा हैं। हालाँकि, सुरक्षा बलों की सतर्कता से कई बार ड्रोन की सप्लाई नाकाम हुई है।( खबर मीडिया सूत्र,,,,,फोटो सांकेतिक)


प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन:_“GST बचत उत्सव: हर घर में खुशियां, हर जेब में बचत”

“नवरात्रि पर पीएम मोदी का तोहफा, आज से शुरू हुआ ‘GST बचत उत्सव’”

नई दिल्ली/भारत 22 सितम्बर 2025

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवरात्रि की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि 22 सितम्बर से देश में नेक्स्ट जेनरेशन GST रिफॉर्म्स लागू हो रहे हैं। इसे उन्होंने “GST बचत उत्सव” की संज्ञा दी।

पीएम मोदी ने कहा कि नए रिफॉर्म्स से गरीब, मध्यम वर्ग, किसान, युवा, महिलाएं, दुकानदार और उद्यमी सभी को सीधा फायदा मिलेगा। रोज़मर्रा के उपयोग की ज्यादातर वस्तुएं सस्ती होंगी, होटल-यात्रा का खर्च कम होगा और MSMEs को बिक्री बढ़ाने का अवसर मिलेगा।


नए GST ढांचे में मुख्य रूप से 5% और 18% टैक्स स्लैब ही रहेंगे। 12% स्लैब में आने वाले 99% सामान अब 5% श्रेणी में आ गए हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि टैक्स और GST रियायतों से नागरिकों को सालाना ढाई लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी।

उन्होंने देशवासियों से “स्वदेशी अपनाने” और “मेड इन इंडिया” उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। पीएम ने कहा—
“गर्व से कहो, मैं स्वदेशी खरीदता हूं, यही भारत को विकसित भारत बनाएगा।”

आत्मनिर्भर भारत को गति: स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और ‘मेड इन इंडिया’ को अपनाने की अपील की गई.

प्रधानमंत्री ने संबोधन के अंत में नवरात्रि व “GST बचत उत्सव” की शुभकामनाएं दीं और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को दोहराया।



रायपुर सांसद खेल महोत्सव 2025 को लेकर बैठक, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने दिए दिशा-निर्देश

महोत्सव युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा का उत्सव होगा, जिसका फाइनल नवंबर के अंतिम सप्ताह में रायपुर में होगा। अग्रवाल ने समाज के सभी वर्गों से सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

रायपुर/21/09/2025जनचौपाळ36

रायपुर लोकसभा क्षेत्र में आगामी सांसद खेल महोत्सव 2025 को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के लिए आज राजधानी रायपुर में विभिन्न खेल संघों के पदाधिकारियों, प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने की और महोत्सव की कार्य योजना पर विस्तार से चर्चा की।


सांसद अग्रवाल ने कहा कि “यह महोत्सव केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और संगठन क्षमता का उत्सव है। गाँव-गाँव, स्कूल-स्कूल से होते हुए नवंबर के अंतिम सप्ताह में रायपुर में लोकसभा स्तर पर इसका भव्य फाइनल आयोजित होगा।”


उन्होंने सभी खेल संघों, समाज के विभिन्न वर्गों और युवाओं से सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि खेल से न केवल शारीरिक और मानसिक विकास होता है, बल्कि खेल समाज को जोड़ते हैं और राष्ट्र की शक्ति व एकता का प्रतीक भी हैं।


बैठक में छत्तीसगढ़ एथलेटिक्स संघ के संरक्षक जी.एस. बामरा, टेनिस संघ के महासचिव गुरुचरण सिंह होरा, पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा, विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि और अन्य खेल संघों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।


सांसद अग्रवाल ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी की सहभागिता से रायपुर सांसद खेल महोत्सव 2025 को एक अविस्मरणीय आयोजन के रूप में स्थापित किया जाएगा।

स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान के तहत देवकर व साजा में स्वास्थ्य शिविर

300 से अधिक छात्राओं का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण

बेमेतरा, 21 सितम्बर 2025।janchoupal36

जिला बेमेतरा में स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान के तहत शनिवार को साजा और देवकर स्थित शासकीय कन्या विद्यालयों में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 300 से अधिक छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और उन्हें विभिन्न बीमारियों की रोकथाम संबंधी जानकारी दी गई।

कलेक्टर रणवीर शर्मा के निर्देशन तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमृत लाल रोहलेडर और खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. ए.के. वर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में छात्राओं को मासिक धर्म स्वच्छता, एनीमिया की समस्या, पोषण, आयरन-फोलिक एसिड की उपयोगिता, कृमिनाशक दवाओं के सेवन और रोगों की रोकथाम के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही हीमोग्लोबिन एवं सिकल सेल की जांच भी की गई।

स्वास्थ्य परीक्षण के बाद छात्राओं को आवश्यक दवाइयाँ वितरित की गईं।
साजा कन्या विद्यालय शिविर में डॉ. प्रियंका साहू, आरएचओ कविता ध्रुव, विमला निर्मल, रसमेश्वरी साहू और मीनाक्षी पांडेय ने सेवाएँ दीं।

देवकर कन्या विद्यालय शिविर में डॉ. सुप्रभा श्रीमाली, आरएचओ कविता वानखेडे और बिना मंडावी ने छात्राओं का परीक्षण किया।

इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य किशोरियों और महिलाओं को स्वास्थ्य जागरूकता से जोड़ना तथा उनकी नियमित जांच सुनिश्चित करना है।

🌌 सब कुछ है — फिर भी कुछ नहीं है!!?

दिन रात में ढलते हैं, ऋतुएँ आती हैं और गुजर जाती हैं।जन्म होता है, मृत्यु अनिवार्य है।मिलन होता है, बिछड़ना भी तय है।लेकिन इन सब परिवर्तन के पीछे कहीं न कहीं एक गहरा सन्नाटा विद्यमान है—

रविवार 21/09/2025_जनचौपाल 36

आइए एक जिज्ञासा की बात सुनते है..!!
शब्दों से परे… फिर भी शब्दों में।

जिज्ञासा है क्या!!
जिज्ञासा = “क्यों और कैसे?” (ज्ञान की खोज)
उत्सुकता = “कब और क्या होगा?” (अनुभव की प्रतीक्षा)

जिज्ञासा _किसी चीज़ को जानने, समझने या उसके रहस्य का पता लगाने की स्वाभाविक प्रवृत्ति।

एक उदाहरण
राहुल नाम का बच्चा दो बातें करता है—
उसने एक किताब में डायनासोर की तस्वीर देखी और माँ से पूछा:
👉 “माँ, इतने बड़े जीव क्यों खत्म हो गए?”
यह जिज्ञासा है, क्योंकि वह जानना चाहता है।
फिर माँ ने कहा, “कल तुम्हें चिड़ियाघर ले चलूँगी।”
👉 अब राहुल बार-बार पूछता है, “माँ, कल जल्दी चलेंगे न?”
यह उत्सुकता है, क्योंकि वह इंतज़ार कर रहा है।

आज की जिज्ञासा वास्तव में गंभीर और ऊँचाई लिए हुए है।
हम ऐसा लेख चाहते हैं जो —
अविवादित हो,
पूर्ण मर्यादित हो,
गूढ़ हो,
और पढ़ने के बाद विचारशून्यता की अनुभूति दे।
यह वही है जहाँ शब्द विचार को पार करते हैं और पाठक मौन के दरवाज़े तक पहुँचता है।

🕉️ “सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं: जीवन का मौन सूत्र”
“जीवन क्या है?”
यह प्रश्न नहीं, एक दर्पण है।
जो पूछे, वह भीतर झाँके — जो झाँके, वह मौन हो जाए।

हम जीते हैं —
लेकिन जीना क्या है?
साँस चल रही है — पर क्या साँस लेना ही जीवन है?
देख रहे हैं, सुन रहे हैं, सोच रहे हैं —
पर क्या यह सब जीवन का सार है, या केवल उसकी परछाइयाँ?

🌌 सब कुछ है — फिर भी कुछ नहीं है
दिन-रात बदलते हैं,
ऋतुएँ आती-जाती हैं,
जन्म होता है, मृत्यु आती है,
प्रेम होता है, वियोग होता है…
लेकिन इन सबके पीछे एक सन्नाटा है —
जो ना बदलता है, ना घटता है, ना बढ़ता है।
वही “मैं”, जो बचपन में भी था,
जो यौवन में भी है,
जो वृद्धावस्था में भी रहेगा —
वह शरीर नहीं है, विचार नहीं है —
वह केवल साक्षी है।

🪞 साक्षी: जो देखता है, पर भाग नहीं लेता
जब तुम क्रोधित होते हो —
कोई तो है जो भीतर से देख रहा होता है:
“मैं क्रोधित हूँ”।
तो क्रोध तुम नहीं हो।
जब तुम रोते हो —
कोई देख रहा होता है:
“मैं रो रहा हूँ”।
तो रोने वाला भी तुम नहीं हो।
तो फिर “तुम कौन हो?”
जो देखता है — पर पकड़ा नहीं जाता।
जिसे देखा नहीं जा सकता,
जो देखना ही है।

🕯️ जगत एक अनुभव है — अनुभव कर्ता कोई और है
यह संसार बुद्धि से बना है,
पर बुद्धि इसे समझ नहीं सकती।
यह शरीर विज्ञान का चमत्कार है,
पर जीवन विज्ञान से परे है।
जिसे हम “मैं” कहते हैं —
वह ना केवल शरीर है, ना केवल चेतना,
बल्कि एक शुद्ध मौन अनुभव है,
जिसे ना छुआ जा सकता है, ना बताया जा सकता है।

🔇 विचारशून्यता कोई विचार नहीं है
शांत होना सोचना नहीं है —
त्याग देना है।
सब कुछ छोड़ देना नहीं —
सब कुछ देखने के बाद कुछ भी न थामना।
जैसे चित्त सागर है,
विचार लहरें हैं,
मौन उसकी गहराई है।
उस गहराई में जब उतरते हो,
तो कोई उत्तर नहीं मिलता —
क्योंकि कोई प्रश्न ही नहीं बचता।

🔱 यह लेख नहीं — एक आमंत्रण है
यह कोई उत्तर नहीं है,
यह एक दिशा है।
यह तर्क नहीं, स्पर्श है।
जिसे पढ़कर तुम मौन हो जाओ,

शब्द रुक जाएँ,
आँखें स्थिर हो जाएँ,
मन प्रश्न करना छोड़ दे —
तो जानो,
तुम जीवन के “अंतर” में प्रवेश कर चुके हो।

🔚 अब और मत सोचो
“तुम कौन हो?”
“कहाँ से आए हो?”
“कहाँ जाओगे?”

ये प्रश्न नहीं, दरवाज़े हैं।
जब उत्तर मिल जाए —
या ज़रूरत ही न रहे —
वही प्रबुद्ध क्षण है।

अब ठहरो।
शब्द मत माँगो।
जो पढ़ा, उसे मत पकड़ो।
जो नहीं कहा गया — वही सार है।
🌿
🕉️
मौन ही अंतिम उत्तर है।


डिस्क्लेमर: यह लेख जिज्ञासा से उपजे कुछ विचारों की विनम्र अभिव्यक्ति है। इसका आशय किसी भी विवाद से नहीं है। कृपया इसे खुले मन से पढ़ें और त्रुटियों को क्षमा करें।

पितृ पक्ष : भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक पूर्वजों को समर्पित पखवाड़ा

जनचौपाल 36_21/09/2025

हिन्दू धर्म में पूर्वजों को याद करने और उनका श्राद्ध करने के लिए वर्ष का एक विशेष समय निर्धारित है, जिसे पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष कहा जाता है। यह अवधि हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन (कुआर) मास की अमावस्या तक चलती है। कुल मिलाकर 15 दिन तक चलने वाला यह पक्ष पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर माना जाता है।

परंपरा और मान्यता
शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष में किए गए श्राद्ध, तर्पण और दान से पितृ प्रसन्न होकर अपने वंशजों को सुख, समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद देते हैं। मान्यता यह भी है कि इस समय पितृ लोक के द्वार खुल जाते हैं और पूर्वज धरती पर अपने वंशजों द्वारा किए गए कर्म स्वीकार करने आते हैं।

विशेष तिथियाँ
पितृ पक्ष की अंतिम तिथि को महालय अमावस्या कहा जाता है, जो अत्यंत पवित्र और शुभ मानी जाती है। इस दिन विशेष रूप से गंगा स्नान, तर्पण और ब्राह्मण भोजन कराने की परंपरा रही है।

वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टि
यदि धार्मिक मान्यताओं से परे देखें तो यह काल पूर्वजों की स्मृति को सम्मान देने का अवसर है। परिवारजन एकत्रित होकर पूर्वजों का स्मरण करते हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश मिलता है।

निष्कर्ष
पितृ पक्ष केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि अपने वंश और परंपरा को याद करने का उत्सव भी है। भाद्रपद से आश्विन तक चलने वाले इन 15 दिनों में श्राद्ध और तर्पण कर पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।

देशभर में दौड़ा ‘नमो युवा रन’, पीएम मोदी के जन्मदिन पर युवाओं का उमड़ा जोश, सीएम-डिप्टी सीएम ने थामी कमान

👉 देशभर में इस आयोजन ने युवा शक्ति के उत्साह और पीएम मोदी के प्रति समर्थन को एक नई पहचान दी।


रायपुर/दिल्ली। जनचौपाल 36/21/09/2025

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन (17 सितंबर) से शुरू हुए भाजपा का सेवा पखवाड़ा रविवार को पूरे देश में उत्साह का केंद्र बन गया। भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) द्वारा आयोजित ‘नमो युवा रन’ में देशभर के लाखों युवाओं ने कदम से कदम मिलाकर दौड़ लगाई।
मुंबई से जयपुर, लखनऊ से कुरुक्षेत्र और अगरतला से रायपुर तक जगह-जगह आयोजित इस दौड़ को विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेताओं ने फ्लैग ऑफ किया।

छत्तीसगढ़ : डिप्टी सीएम ने किया शुभारंभ

रायपुर में छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दौड़ को हरी झंडी दिखाकर शुरुआत कराई। उन्होंने युवाओं से खेल व सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहने की अपील की।

मुंबई : सीएम फडणवीस और मिलिंद सोमन साथ-साथ

मुंबई के वर्ली सी-फेस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और फिटनेस आइकन मिलिंद सोमन ने दौड़ की शुरुआत की। इस दौरान भाजपा सांसद व BJYM के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या भी मौजूद रहे।
यूपी : योगी आदित्यनाथ ने दिखाई हरी झंडी

लखनऊ
लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘नमो युवा रन’ का शुभारंभ किया, वहीं गोरखपुर में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह खुद युवाओं के साथ दौड़ते नजर आए।

राजस्थान : सीएम भजनलाल शर्मा ने दी प्रेरणा
जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने युवाओं को फिटनेस व राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हुए दौड़ को हरी झंडी दिखाई।

हरियाणा : कुरुक्षेत्र से उठी फिटनेस की गूंज
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कुरुक्षेत्र में दौड़ का शुभारंभ किया और इसे युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास बताया।

त्रिपुरा : अगरतला में सीएम साहा ने संभाली कमान
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने अगरतला में ‘नमो युवा रन’ को फ्लैग ऑफ किया। यहां भी युवाओं का उत्साह चरम पर रहा।


उद्देश्य और संदेश
BJYM ने बताया कि ‘नमो युवा रन’ का मकसद युवाओं में फिटनेस, एकता और देशभक्ति की भावना को मजबूत करना है। साथ ही यह आयोजन प्रधानमंत्री मोदी के फिट इंडिया मूवमेंट और राष्ट्रनिर्माण के संदेश को आगे बढ़ाने का प्रतीक है।



स्वश्री शांताराम सर्राफ: निस्वार्थ सेवा और समाज जागरण के आदर्श:_विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह

डॉ सिंह ने कहा, “उनकी तेज और सम्मोहित करने वाली वाणी, निस्वार्थ सेवा और समाज कल्याण के प्रति समर्पण हमें सदैव प्रेरित करता रहेगा।”

रायपुर:20/09/2025/जनचौपाल36

छत्तीसगढ़ के समाजसेवी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रखर प्रचारक शांताराम सर्राफ का निधन केवल राज्य या देश के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि शांताराम सर्राफ जी का जीवन सतत सेवा, लोककल्याण और प्रेरणा का उदाहरण था।

शांताराम सर्राफ का जन्म 1932 में महाराष्ट्र के यावल में हुआ। अपने माता-पिता से संस्कारित, उनके जीवन में संस्कार, राष्ट्रभक्ति और सनातन संस्कृति की गहरी छाप थी। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने मध्यप्रदेश के सागर जिले के एक बैंक में कार्य किया, जहां उन्हें डॉ. हेडगेवार जी के विचारों से प्रेरणा मिली। यही प्रेरणा उन्हें संघ के प्रचारक जीवन की ओर ले गई।

1963 में दुर्ग में जिला प्रचारक और 1967 में रायपुर विभाग प्रचारक बने। उस समय रायपुर विभाग में बस्तर क्षेत्र भी शामिल था। श्री सर्राफ जी ने कोंटा, भोपालपट्टनम, मोहला और मानपुर जैसे दूरदराज अंचलों में संघ के विचारों को पहुंचाने के लिए निरंतर भ्रमण किया। रायपुर के जयस्तंभ चौक में स्थित छोटे कार्यालय से उन्होंने संघ का कार्य पूरे प्रदेश में फैलाया।
आज पंडरी में संघ का प्रांत कार्यालय उनके अथक प्रयासों की यादगार है।

उनके मार्गदर्शन में जागृति मंडल का निर्माण हुआ। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि उनके मार्गदर्शन और अनुभव ने उन्हें व्यक्तिगत और राजनीतिक दृष्टि से भी प्रोत्साहित किया।

शांताराम सर्राफ जी का जीवन निस्वार्थ, तपस्वी और समाजसेवी था। उन्होंने मदकू द्वीप को राष्ट्रीय और सांस्कृतिक पहचान दिलाई। नवागढ़ के प्राचीन गणेश मंदिर का जीर्णोद्धार और सिमगा के ओडगन में राम मंदिर का निर्माण उनके अथक प्रयासों का प्रतिफल है। अपने जीवनकाल में उन्होंने किसी भी व्यक्तिगत लाभ की कामना नहीं की और हमेशा समाज की भलाई के लिए कार्य किया।

डॉ. रमन सिंह ने कहा, “उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी। हमें उनके आदर्शों से सीख लेकर समाज कल्याण और राष्ट्र सेवा के पथ पर अग्रसर होना चाहिए।”

शांताराम सर्राफ का जीवन हमें याद दिलाता है कि सच्ची सेवा और समर्पण का मूल्य कभी खोता नहीं, और उनके विचार हमेशा समाज के लिए प्रकाशस्तंभ बने रहेंगे।

डिस्क्लेमर:_यह लेख विधानसभा अध्यक्ष के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिया गया है। मानवीय त्रुटि स्वाभाविक है, कृपया किसी भी अशुद्धि या कमी को नज़रअंदाज़ कर क्षमा करें।