रायपुर, धरसीवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसील क्षेत्रों में टाटा पावर को बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए पूर्व संसदीय सचिव एवं कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने न्यायालय में याचिका दायर की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि निजी कंपनी को बिजली वितरण में प्रवेश देने से सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था और उपभोक्ताओं पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) के रिकॉर्ड के अनुसार टाटा पावर कंपनी लिमिटेड ने याचिका क्रमांक 89/2026 के माध्यम से रायपुर जिले के इन चार तहसील क्षेत्रों में वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। आयोग ने इस मामले में 1 अक्टूबर 2026 को सुबह 11.30 बजे जनसुनवाई निर्धारित की है। फिलहाल टाटा पावर को लाइसेंस नहीं मिला है और मामला नियामकीय प्रक्रिया में है।
विकास उपाध्याय ने कहा कि चारों क्षेत्रों में समानांतर वितरण व्यवस्था शुरू होने से छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी (CSPDCL) के राजस्व पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने दावा किया कि टाटा पावर ने अपने आवेदन में आगामी पांच वर्षों में नेटवर्क विकसित करने के लिए करीब 435 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है। उपाध्याय ने सवाल उठाया कि इतने निवेश से इतने बड़े क्षेत्र में आवश्यक सब-स्टेशन और बिजली लाइनों का पूरा नेटवर्क कैसे तैयार होगा।
उन्होंने निजी बिजली वितरण व्यवस्था को लेकर महाराष्ट्र और ओडिशा के कुछ क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे उपभोक्ताओं के लिए बिजली दर और सेवा से जुड़े नए सवाल खड़े हो सकते हैं। उन्होंने स्मार्ट मीटर और बिजली बिलों में कथित बढ़ोतरी का मुद्दा भी उठाया।
उपाध्याय ने आरोप लगाया कि निजी कंपनी को केवल अधिक राजस्व वाले क्षेत्रों में प्रवेश मिलने से सरकारी कंपनी पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है और इसका असर किसानों तथा गरीब उपभोक्ताओं को मिलने वाली क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था पर पड़ सकता है। उन्होंने ‘पीएम सूर्य घर योजना’ और औद्योगिक बिजली दरों को लेकर भी केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने मांग की कि टाटा पावर की याचिका खारिज की जाए। उपाध्याय ने कहा कि यदि निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश हुई तो कांग्रेस सड़क से विधानसभा तक आंदोलन करेगी। याचिका अधिवक्ता शशांक मिश्रा, शुभेंद्रु प्रकाश राय और संतोष कुमार के माध्यम से दायर की गई है।