बेमेतरा/बेरला, 24 अक्टूबर 2026
गांव का सचिव और सरपंच चाहें तो किसी बच्ची का बचपन बच सकता है। इसी भरोसे के साथ बेरला जनपद पंचायत के सभागार में गुरुवार को पूरे ब्लॉक के सरपंच और सचिव एक साथ बैठे। मकसद था, बाल विवाह की हर कोशिश को गांव में ही रोकना।
सचिव केवल पंचायत का कामकाज ही नहीं देखते, कानून की नज़र में वे बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी भी हैं। यानी गांव में किसी नाबालिग की शादी की भनक लगते ही कार्रवाई की पहली जिम्मेदारी उन्हीं की है।
कार्यशाला में यही बात बार-बार दोहराई गई।परियोजना अधिकारी डॉ. विद्यानंद बोरकर ने दो टूक कहा कि बाल विवाह परंपरा नहीं, कुरीति है और कानूनन अपराध भी।
उन्होंने कहा कि सूचना मिलते ही देर नहीं करनी है। तुरंत मौके पर पहुंचें और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या नजदीकी थाने को खबर दें।जिला बाल संरक्षण अधिकारी व्योम श्रीवास्तव ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की बारीकियां समझाईं। सजा के प्रावधान क्या हैं, सीएमपीओ के पास क्या अधिकार हैं और उनकी क्या जिम्मेदारियां हैं, यह सब विस्तार से बताया गया।
उनका कहना था कि सब मिलकर काम करें और सूचना तेजी से आगे बढ़े, तो ऐसी घटनाओं को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
चाइल्ड हेल्पलाइन के जिला परियोजना समन्वयक राजेंद्र चंद्रवंशी ने पॉक्सो अधिनियम 2012 के जरूरी प्रावधान बताए। साथ ही यह भी समझाया कि संकट में फंसे बच्चे के लिए 24 घंटे चलने वाली टोल-फ्री हेल्पलाइन 1098/112 कैसे काम करती है, मदद कितनी जल्दी पहुंचती है और बच्चे के पुनर्वास की क्या व्यवस्था है।
कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे अपनी पंचायत को बाल विवाह मुक्त बनाएंगे और बच्चों के अधिकारों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
कार्यशाला कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगई के निर्देश, जिला कार्यक्रम अधिकारी ऋतेश कुमार टंडन के मार्गदर्शन और जनपद पंचायत बेरला की सीईओ दिव्या ठाकुर की अध्यक्षता में हुई।
इसमें ब्लॉक के कई गांवों के सरपंच, सचिव और विभागीय अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।जरूरी नंबर: कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिले तो चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या 112 पर तुरंत सूचना दें।
