छत्तीसगढ़ : ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि सामने आई है। महासमुंद जिले में स्थित प्राचीन ऐतिहासिक स्थल सिरपुर को UNESCO की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है। इस फैसले से सिरपुर के भविष्य में विश्व धरोहर स्थल बनने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। इसे राज्य के इतिहास, संस्कृति और पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत सरकार ने भेजा था प्रस्ताव
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत सरकार ने 28 सितंबर 2026 को सिरपुर को UNESCO की अस्थायी विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए प्रस्ताव भेजा था। इसके बाद 19 अक्टूबर को जिनेवा में हुई प्रक्रिया के तहत इसे सूची में शामिल किए जाने की घोषणा की गई।इस उपलब्धि से महासमुंद सहित पूरे छत्तीसगढ़ में उत्साह का माहौल है। अब सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की उम्मीद और बढ़ गई है।
प्राचीन दक्षिण कोसल की राजधानी रहा है सिरपुर
सिरपुर का इतिहास बेहद समृद्ध रहा है। प्राचीन काल में यह दक्षिण कोसल की राजधानी के रूप में महत्वपूर्ण स्थान रखता था। यहां हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मों से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरें एक साथ मौजूद हैं, जो इस क्षेत्र की धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती हैं।महानदी के तट पर बसे इस ऐतिहासिक क्षेत्र में प्राचीन मंदिर, बौद्ध मठ, स्तूप और जैन प्रतिमाएं मौजूद हैं। ये अवशेष उस दौर की कला, स्थापत्य और धार्मिक परंपराओं की झलक पेश करते हैं।
लक्ष्मण मंदिर से लेकर बौद्ध विहारों तक फैली विरासत
सिरपुर में पुरातात्विक उत्खनन के दौरान कई महत्वपूर्ण अवशेष सामने आए हैं। यहां का लक्ष्मण मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध है। ईंटों से निर्मित यह मंदिर भारतीय प्राचीन स्थापत्य कला का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।इसके अलावा आनंदप्रभु कुटी विहार, गंधेश्वर महादेव मंदिर और स्वास्तिक विहार भी सिरपुर की ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा हैं। यहां मिले पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि पांचवीं से आठवीं शताब्दी के बीच सिरपुर राजनीतिक, धार्मिक और व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा था।
अस्थायी सूची के बाद क्या है अगला कदम?
UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने की प्रक्रिया में अस्थायी सूची महत्वपूर्ण शुरुआती चरण है। इसके बाद संबंधित देश को स्थल के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक या प्राकृतिक महत्व के प्रमाणों के साथ विस्तृत नामांकन प्रस्ताव तैयार करना होता है। आगे मूल्यांकन और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किसी स्थल को अंतिम विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जा सकता है।सिरपुर का अस्थायी सूची में पहुंचना इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब इसके स्थायी नामांकन के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से आगे की तैयारी किए जाने की उम्मीद है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है फायदा
सिरपुर को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने से छत्तीसगढ़ में ऐतिहासिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इससे देश-विदेश के पर्यटकों की रुचि इस स्थल में बढ़ने, स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा होने और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।हालांकि, UNESCO की अस्थायी सूची में शामिल होना अंतिम विश्व धरोहर दर्जा मिलने के बराबर नहीं है। इसके बावजूद यह उपलब्धि सिरपुर की ऐतिहासिक महत्ता को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक अहम कदम है।


