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Saturday, October 10, 2026

छत्तीसगढ़ में कंवर समाज को 90 लाख रुपये की सौगात, करमा महोत्सव के लिए हर साल मिलेंगे 10 लाख रुपये, सीएम साय ने की कई घोषणाएं

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कंवर समाज के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं। राजधानी रायपुर के बलवीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित करमा परब महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने सामाजिक भवनों और सांस्कृतिक मंच के निर्माण के लिए कुल 90 लाख रुपये देने का ऐलान किया। इसके अलावा रायपुर में हर साल करमा महोत्सव आयोजित करने के लिए 10 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा भी की गई।छत्तीसगढ़ प्रदेश कंवर समाज युवा प्रभाग की महानगर इकाई की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समाज के लोगों को करमा तिहार की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ महोत्सव का शुभारंभ किया और जनजातीय संस्कृति, सामाजिक एकता तथा पर्यावरण संरक्षण में इस पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला।

कोरबा, रायपुर और कांकेर में बनेंगे सामाजिक भवन और सांस्कृतिक मंच

करमा परब महोत्सव में मुख्यमंत्री ने अलग-अलग स्थानों पर निर्माण कार्यों के लिए आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। इसके तहत कोरबा जिले के मड़वारानी में सामाजिक भवन बनाने के लिए 50 लाख रुपये दिए जाएंगे। रायपुर के टाटीबंध में सामाजिक भवन के निर्माण के लिए 25 लाख रुपये और कांकेर जिले के ग्राम जेफरा में सांस्कृतिक मंच बनाने के लिए 15 लाख रुपये देने का ऐलान किया गया।इन तीनों निर्माण कार्यों के लिए कुल 90 लाख रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त राजधानी रायपुर में प्रतिवर्ष करमा महोत्सव के आयोजन के लिए 10 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। इस तरह मुख्यमंत्री की घोषणाओं में कुल एक करोड़ रुपये की राशि शामिल है।

करमा तिहार जनजातीय संस्कृति और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि करमा तिहार छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय परंपराओं और प्रकृति के साथ मानव जीवन के संबंध को दर्शाता है। यह पर्व लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने और सामूहिक रूप से परंपराओं का निर्वहन करने की प्रेरणा देता है।उन्होंने कहा कि कंवर समाज ने अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर रखा है। नई पीढ़ी तक इन परंपराओं को पहुंचाना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना किसी भी समाज की मजबूती का आधार होता है।

करम डार की पूजा, पारंपरिक गीत और नृत्य से जुड़ा है पर्व

करमा तिहार में करम वृक्ष की डाली की पूजा की जाती है। इस अवसर पर समाज के युवक-युवतियां उपवास रखकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं। रात में जागरण के दौरान करमा गीत गाए जाते हैं और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए जाते हैं। अगले दिन करम डार के विसर्जन के बाद व्रत का पारण किया जाता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पर्व के माध्यम से प्रकृति के प्रति सम्मान और सामूहिक जीवन की भावना मजबूत होती है। जनजातीय समाज के लिए जल, जंगल और जमीन केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि उनकी संस्कृति, आस्था और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा हैं।

पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी जरूरी: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री साय ने पर्यावरण संरक्षण की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति की रक्षा के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है। छत्तीसगढ़ में भी सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से पौधरोपण को प्रोत्साहित किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण उपलब्ध कराना सभी का साझा दायित्व है। करमा तिहार जैसे पर्व प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और उसके संरक्षण के विचार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

शिक्षा, नशामुक्ति और युवाओं की भागीदारी पर दिया जोर

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कंवर समाज में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति के लिए शिक्षा, अच्छे संस्कार, संगठन और जागरूकता जरूरी हैं। युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ विज्ञान और तकनीक के क्षेत्रों में भी अपनी भागीदारी बढ़ानी चाहिए।उन्होंने नशामुक्ति के लिए समाज की ओर से किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा करते हुए युवाओं से नशे से दूर रहने और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने सामाजिक एकता को मजबूत करने और सकारात्मक गतिविधियों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया।

जनजातीय समाज के विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समुदायों की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सरकार का उद्देश्य है कि जनजातीय समाज अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए विकास के नए अवसरों का लाभ उठा सके।कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने आयोजन से जुड़े कंवर समाज युवा प्रभाग और सामाजिक पदाधिकारियों की सराहना की। उन्होंने उपस्थित समाजजनों को करमा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

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